देश की सबसे बड़ी परीक्षा संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा का परिणाम शुक्रवार शाम को घोषित हो गया। इस साल इस परीक्षा को टॉप करके हैदराबाद के अनुदीप दुरीशेट्टी ने देश भर में अपना नाम कमाया है। देश की सेवा करने की चाह रखने वालों के लिए इससे अच्छा और कोई मौका नहीं हो सकता इस एक मौके को पाने के लिए जी जान की मेहनत करते हैं लाखों लोग पर सफलता लगती है कुछ चंद लोगो को जी हाँ ये संख्या तो हज़ारो में भी नहीं है कई लाख बच्चों पर 990 बच्चे सेलेक्ट होते हैं यानि की जो सफलता का रेश्यो है  0.1% है यही भी एक एक वजह से जो इसको देश का सबसे कठिन परीक्षा परीक्षा बनाती है। अनुदीप तेलंगाना के जगतियाल जिले के मेटपल्ली कस्बे के रहने वाले हैं।

इस आर्टिकल में आज हम अनुदीप की तैयारी से जुड़ी बाते रहे हैं जो भी विद्यार्थी यूपीएससी की तैयारी कर रहे वो एक बार इस आर्टिकल को जरूर पढ़ें अनुदीप ने इतनी बड़ी सफलता एक बार में ही नहीं पा ली उन्होंने अपनी ज़िन्दगी के पूरे पाँच साल दिये बिना डगमाये तभी ये सफलता हाथ लगी इसीलिए अगर आप भी निराश है कही तो एक बार इसे जरूर पढ़ें फिर कोई फैसला लें।

सूर्योदय हाई स्कूल से पढ़े हैं अनुदीप

हर कोई अनुदीप दुरशेट्टी के बारे में जानना चाहता है कि उन्होंने अपनी पढाई कहाँ से की है और उन्हें क्या पसन्द था क्या नहीं वो कैसे पढ़ा करते थे वगरह वगरह , वो भी हम सब की तरह ही एक आम विद्यार्थी थे जिनकी आँखों में भी आईएएस अफसर बनकर देश के लिए कुछ करने का ख्वाब था और इस ख्वाब की शुरुआत हुई थी सूर्योदय हाई स्कूल जहाँ से उन्होंने अपनी पढाई पूरी की इसके बाद इन सपनो को उड़ान लगी जब वे कॉलेज में आये उन्होंने बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी पिलानी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन में इंजीनियरिंग की और वहां से नौकरी भी हासिल की।

जॉब के साथ करते थे तैयारी

अनुदीप दुरशेट्टी990 ने अपनी इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद गूगल  जैसी बड़ी कंपनी में भी काम किया है लेकिन उनके सपनों की उड़ान यहाँ कहाँ रुकने वाली थी लग गए वो नौकरी के साथ सिविल सर्विसेज की तैयारी में जहाँ हम जैसे लोग टाइम को बहाना बनाकर मेहनत करने से रुक जाते हैं लेकिन अनुदीप ऐसे नहीं थे उन्होंने नौकरी के साथ अपनी पढ़ाई शुरू कि वे बताते हैं कि उन्हें ऑफिस की वजह से पढ़ने का ज्यादा टाइम नहीं मिल पाता था तो वे वीकेंड पर पूरा समय अपनी पढ़ाई को देते थे उससे भी बड़ी बात उन्होंने इन सब के लिए कोई अलग से कोचिंग भी नहीं ली।

जब बने वो IRS OFFICER

जी हाँ वे आईएस ऑफिसर बनने से पहले आईआरएस अफसर भी रह चुके हैं। उन्होंने 2012 से अपनी पढाई शुरू की थी और 2013  में उन्होंने आईआरएस के रुप में ज्वाइन किया उस साल उनकी 790 रैंक थी लेकिन उन्होंने अपने आईएएस बनने के सपने को नहीं छोड़ा और फिर तीन असफलता के बाद आखिरकार उन्हें सफलता मिल ही गयी और सफलता अपने आप में किसी सपने से काम नहीं है संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सेलेक्ट होना ही बड़ी बात है और इन्होंने तो टॉप ही कर लिया।

अनुदीप के जीवन की कुछ और बाते  

  • हालांकि आधिकारिक यूपीएससी रैंक-सूची में उन्हें दुरशेट्टी अनुदीप के रूप में उल्लेख किया गया है, लेकिन वह अपने दोस्तों के बीच अनुदीप या दुरी के रूप में जाने जाते हैं।
  • अनुदीप ने 2011 में राजस्थान में बीआईटीएस पिलानी से अपनी इंजीनियरिंग पूरी की।
  • अनुदीप के पिता टीएस ट्रांसको के साथ एक सहायक अभियंता हैं, जबकि उनकी मां घर बनाने वाली है।
  • यह सिविल में उनका पांचवां प्रयास है।
  • उन्होंने मानव विज्ञान के साथ उनके वैकल्पिक विषय के रूप में परीक्षा उत्तीर्ण की।
  • अनुदीप ने किसी भी कोचिंग संस्थान की सहायता लिए बिना यह सफलता हासिल की है।
  • 2013 यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में दुरिसेटी ने रैंक रैंक 790 को सुरक्षित किया था। भले ही उनके मुख्य अंक अच्छे नहीं थे, फिर भी उनके साक्षात्कार के नंबर उत्कृष्ट थे (204/275)।
  • अनुदीप पहले से ही एक सिविल सेवक है और वर्तमान में भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस), भारत सरकार में सहायक आयुक्त (पी) के रूप में काम कर रहे हैं।
  • आईआरएस में आने से पहले उन्होंने हैदराबाद में Google के साथ काम किया।
  • वह ओबीसी श्रेणी से संबंधित है।
  • अनुदीप एक खेल प्रेमी है और टेनिस और फुटबॉल पसंद करते है।
  • वह खुद को एक उदार के रूप में मानते है।

 इंटरव्यू में कहा : पांचवी बार में मिली सफलता

“यह मेरा पांचवां प्रयास है। मैं तीन बार पहले विफल रहा हूं, और यह सफर मेरे लिए आसान नहीं थी।यह आवश्यक नहीं है कि किसी को कोचिंग संस्थान में दाखिला लेना चाहिए। इन दिनों सबकुछ ऑनलाइन उपलब्ध है।यह एक कठिन परीक्षा है और शानदार दिमागी प्रयासों के साथ इतने सारे योग्य उम्मीदवार हैं। तो आप कभी भी शीर्ष रैंक की उम्मीद नहीं कर सकते हैं।आज मैं यह परिणाम प्राप्त करके वाकई खुश हूं। मैं उन सभी लोगों का आभारी हूं जिन्होंने मुझे पूरे समर्थन दिया। यह एक आसान यात्रा नहीं थी, लेकिन मुझे यहां पहुँचने में खुशी है।मेरा परिवार मेरी रीढ़ की हड्डी रहा है और यदि मेरे पास उनका समर्थन नहीं होता, तो मैं परीक्षा में शीर्ष पर नहीं पहुंच पाया होता “

जैसे कि आपने ऊपर पढ़ा होनहार अनुदीप के बारे में तो आपको पता चला की सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता , सफलता के एक एक सीढ़ी चढ़ना होता है और उससे भी बड़ी अगर आपको लगता है कि आप और मेहनत कर सकते हैं या आपको खुद पर भरोसा है कि आप और आगे बढ़ सकते हैं तो बिलकुल मत सोचिये और लग जाइये अगले मिशन पर क्योंकि अगर अनुदीप भी आईआरएस पर संतुष्ट हो गए होते तो आज इतनी बड़ी सफलता हाथ नहीं लगती।

और हमेशा याद रखिये बड़ी सफलता के साथ हमेशा असफलता जरूर आती है लेकिन उससे घबराना नहीं उसका डटकर सामना करना क्योकि फिर आएगा असली मजा सफलता का ।

 

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