animation

एनीमेशन द्विआयामी या त्रिआयामी कलाकृतियों की छवि का चलने के भ्रम उत्त्पन्न करने के लिए तेजी से किया गया सिलसिलेवार प्रर्दशन है। कंप्यूटर की दुनिया में एनीमेशन के प्रभाव को बनाने के लिए ग्राफ़िक, सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है। इन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके एनीमेशन विधि द्वारा चलती छवियों के रूप में प्रदर्शित करने के लिए हेर फेर किया जाता है।

छात्रों को 12वीं के बाद इस बात की चिंता रहती है कि वह आगे कौन सा कोर्स चुने जो उसका करियर बनाने में मदद कर सके। तो हम अपने इस आर्टिकल से छात्रों को बताएंगे कि एनीमेशन में करियर कैसे बनाये। छात्र एनीमेशन में कौन कौन से कोर्स कर सकते हैं, एनीमेशन कोर्स कहाँ से कर सकते हैं। एनीमेशन कोर्स के लिए शैक्षिक योगयता कितनी होनी चाहिए। इन सभी की जानकारी छात्र हमारे इस पोस्ट को पढ़कर प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान समय में एनीमेशन एक ऐसा विषय बनकर उभरा है जो सभी वर्गों के छात्रों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है क्योंकि एनीमेशन का क्षेत्र एक बहुत बड़ा उद्योग बनकर उभरा है। एनीमेशन के जरिये छात्र को अपनी रचनात्मकता दिखाने की पूरी आज़ादी प्राप्त होती है और वह एनीमेशन के जरिये अपनी एक अलग पहचान बहुत कम समय में बना लेता है।

एनिमेशन के प्रकार

एनीमेशन को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा गया है।

  • 2डी एनीमेशन
  • 3डी एनीमेशन
  • वीएफएक्स एनीमेशन।

एनीमेशन कोर्स करने के लिए शैक्षिक योग्यता

छात्रों को एनीमेशन की प्रोफेशनल शिक्षा पाने के लिए कम से कम 12वीं पास होना चाहिए। इसके साथ साथ छात्र अगर पहले से स्नातक की शिक्षा ग्रहण किये हुए है तो ऐसे विभिन्न कोर्स और डिप्लोमा हैं जो छात्र इसके बाद कर सकते हैं। वैसे अगर किसी छात्र की आर्ट्स के क्षेत्र में क्रिएटिविटी है तो वो छात्र भी एनीमेशन में अपना करियर बना सकते हैं। एनीमेशन के विभिन्न कोर्स होते हैं जैसे एनीमेशन में बीएससी, एमएससी मल्टीमीडिया, एमएससी एनीमेशन आदि विभिन्न प्रकार के कोर्स छात्र कर सकते हैं। इसके अलावा छात्र 2डी और 3डी के कोर्स का चयन भी कर सकते हैं।

एनीमेशन कोर्स का स्कोप

एनीमेशन वर्तमान में एक बहुत बड़ा उद्योग बनकर उभरा है। एनीमेशन कोर्स करने के बाद इस क्षेत्र में करियर बनाने और जल्दी लोकप्रियता हासिल करने का बहुत ज्यादा स्कोप है। छात्र विभिन्न छेत्रों में अपना करियर बना सकते हैं।  एनीमेशन कोर्स करने के बाद छात्र वेब डिज़ाइनिंग, विज्ञापनों के लिए एनीमेशन, विभिन्न प्रकार के वीडियो बनाने, विभिन्न टीवी चैनलों में  संपादन करना, खेलों के विकास में और साथ साथ फिल्म उद्योग और टीवी और कार्टून के क्षेत्र में भी अपना करियर बना सकते हैं। वर्तमान में ऐसी विभिन कम्पनियाँ हैं जो एनीमेशन के क्षेत्र में काम कर रही हैं उसमें अपना करियर बना सकते हैं। इसके साथ साथ छात्र अपना खुद का कोई कार्य कर सकते हैं या फ्रीलांसर की तरह भी अपने करियर में ग्रोथ कर सकते हैं।

एनीमेशन में कोर्स करने के बाद छात्रों के लिए विभिन्न जॉब, एक्सपीरियंस के हिसाब से ऑफर की जाती हैं। इसमें डायरेक्टर, प्रोडक्शन डिज़ाइनर, स्क्रिप्ट राइटर, स्टोरी बोर्ड आर्टिस्ट इलूस्ट्रेटर में संपादन, लेआउट आर्टिस्ट, डिजिटल पेंटर, एनिमेटर, कंपोज़ीटर और एडिटर की विभिन्न जॉब पोस्ट एक्सपीरियंस के हिसाब प्रदान की जाती हैं।

एनीमेशन के क्षेत्र में टॉप कॉलेज और इंस्टिट्यूट के नाम

एनीमेशन कोर्स को करने के लिए विभिन्न कॉलेज और इंस्टिट्यूट हैं जिनमें कुछ कॉलेज और इंस्टिट्यूट मुख्य हैं। छात्र इन कॉलेज और इंस्टिट्यूट से एनीमेशन के विभिन्न कोर्स और डिप्लोमा कर सकते हैं। कुछ कॉलेज और इंस्टिट्यूट छात्रों को एडमिशन देने के लिए एंट्रेंस एग्जाम भी कराती हैं। छात्र एंट्रेंस एग्जाम में भाग लेकर उन कॉलेज और इंस्टिट्यूट में  एडमिशन ले सकते हैं और एनीमेशन के विभिन्न कोर्स कर सकते हैं।

  • नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ डिज़ाइन (NID), अहमदाबाद।
  • मनिपाल यूनिवर्सिटी।
  • बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (BIT), जयपुर।
  • फिल्म एंड टेलीविज़न ऑफ़ इंडिया (FTTI), पुणे।
  • सर जे जे इंस्टिट्यूट ऑफ़ अप्लाइड आर्ट्स, मुंबई।
  • नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फिल्म एंड फाइन आर्ट्स, कोलकाता।
  • फिल्म एंड ललित कला राष्ट्रीय संस्थान।
  • एरिना मल्टीमीडिया अंडर अपटेक यूनिवर्सिटी।
  • आईआईटी गुवाहाटी, मुंबई।

भारत में एनीमेशन की शुरुआत

भारत में एनीमेशन की शुरुआत 20वीं शताब्दी में मानी जाती हैं। फिल्मों के आने से पहले छाया कठपुतलियों और स्लाइड शो जैसे आधुनिक एनीमेशन प्रक्रिया द्वारा लोगों का मनोरंजन किया जाता था। दादा साहेब फाल्के, गनमाय बनर्जी, केएस गुप्ते और जीएस घाकले जैसे व्यक्तियों ने 20वीं शताब्दी में एनीमेशन की परंपरा को बढ़ाया। कहा जाता है की एनिमेटेड स्लाइड शो के रूप में दादा साहेब फाल्के द्वारा राजा हरिश्चंद्र की कहानी 1913 में प्रदर्शित की गई। राजा हरिश्चंद्र भारत की पहली मूकबधिर फिल्म के रूप में जानी जाती है और एनीमेशन की शुरुआत भी यहीं से मानी जाती है।

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