भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का लम्बे समय से चल रहें बीमार 16 अगस्त को शाम 5.05 बजे दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में निधन हो गया। अटल बिहारी 93 वर्ष के थे।छात्रों को उनके जीवन के बारे में जरूर जानना चाहिए। जो भी छात्र किसी भी सरकारी एंव किसी परीक्षा की तैयारी कर रहा है तो उसे हमारा यह आर्टिकल जरूर पढ़ना चाहिए। भारतीय जन संघ से भारतीय जनता पार्टी और सांसद से देश के प्रधानमंत्री तक के सफर में अटल बिहारी वाजपेयी ने कई पड़ाव तय किए। नेहरु-गांधी परिवार के प्रधानमंत्रियों के बाद अटल बिहारी वाजपेयी उन चुनिंदा नेताओँ में शामिल हुए जिन्होंने सिर्फ़ अपने नाम, व्यक्तित्व और करिश्मे के बूते पर सरकार बनाई।पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी न सिर्फ दिग्गज राजनीतिज्ञ थे बल्कि वह महान कवि भी रहे। लंबे राजनीतिक करियर में उनके कार्यों, फैसलों, भाषणों, कविताओं, रचनाओं को हमेशा याद किए जाता रहेगा। हम आज उनकी जीवन की कुछ महत्पूर्ण कड़ियों को याद करेंगे। और यह भी जानने की कोशिश करेंगे की उनको 3 बार भारत के प्रधानमंत्री बनने में अपने जीवन में किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

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अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी 

अटल जी का जन्म 

अटल बारी वाजपेयी का 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर के एक निम्न मध्यमवर्ग परिवार में जन्म हुआ था अटल बिहारी एक स्कूल अध्यापक के घर में पैदा हुए थे उनके पिताजी एक स्कूल में अध्यापक एंव कवि थे। उनके 7 बहन भाई थे। उनके पिताजी का नाम कृष्ण और माता का नाम कृष्णा देवी था पिताजी का कवि होने का असर अटल जी पर भी दिखा उनको भी कविताओं रंग चढ़ गया। लेकिन उनका शुरूआती दौर आसान नहीं था।  उन्होंने अपने जीवन में बहुत सी कठनाइयों सामना किया।

अटल जी की शिक्षा 

अटल बिहारी की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा ग्वालियर के ही विक्टोरिया (अब लक्ष्मीबाई) कॉलेज और कानपुर के डीएवी कॉलेज में हुई।उन्होंने राजनीतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर किया और पत्रकारिता में अपना करियर शुरु किया। उन्होंने राष्ट्र धर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन का संपादन किया।

अटल जी का शिक्षा में योगदान 

  • भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की शिक्षा के बहुत से योगदान है भारत में 6 अन्य जगह एम्स को खोलने की  पहल अटल जी ने की थी और भारत सबसे अच्छी शिक्षा देने और उसको बढ़ावा देने की योजना भी अटल जी की देन थी।
  • 2001 में सर्व शिक्षा अभियान भी अटल सरकार ने शुरू किया था। उनका कहना था की शिक्षा सबका अधिकार है क्या वहां ग़रीब हो या आमिर।

अटल जी की  आज शिक्षा पर महत्पूर्ण बातें 

  • शिक्षा आज व्यापार बन गई है। ऐसी दशा में उसमें प्राणवत्ता कहां रहेगी? उपनिषदों या अन्य प्राचीन ग्रंथों की ओर हमारा ध्यान नहीं जाता। आज विद्यालयों में छात्र थोक में आते हैं।
  • शिक्षा के द्वारा व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास होता है। व्यक्तित्व के उत्तम विकास के लिए शिक्षा का स्वरूप आदर्शों से युक्त होना चाहिए। हमारी माटी में आदर्शों की कमी नहीं है। शिक्षा द्वारा ही हम नवयुवकों में राष्ट्रप्रेम की भावना जाग्रत कर सकते हैं।

अटल बिहारी की राजनीति में शरुआत 

  • अटल बिहारी वाजपेयी की राजनितिक शरुआत भारत छोड़ो आंदोलन 1942 से हुई। उस आंदोलन के दौरान अटल जी जेल भी गए। वो एक ऐसा समय था अटल जी एक राजनेता के रूप में समाज के सामने ला रहा था।
  •  1951 में बने भारतीय जन संघ के संस्थापक सदस्य थे। अपनी कुशल वाकपटुता और भाषण शैली से राजनीति के शुरुआती दिनों में ही उन्होंने रंग जमा दिया। हालांकि लखनऊ में एक लोकसभा उप चुनाव में वो हार गए थे।
  • 1957 में जन संघ ने उन्हें तीन लोकसभा सीटों लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़ाया। लखनऊ में उनकी हार हुई तथा मथुरा में उनकी जमानत जब्त हो गई लेकिन बलरामपुर से चुनाव जीतकर दूसरी लोकसभा में पहुंचे। उनके संसदीय करियर की यह शुरुआत थी।
  • 1977 में भारतीय जन संध पार्टी ने भारतीय लोकदल के साथ गठबंधन कर लिया जिसमे हम आज भारतीय जनता पार्टी के नाम से जानते है उसका  पहले जनता पार्टी नाम था।जनता पार्टी ने सफल पार्टी के साथ लोक सभा में चुनाव जीता। किसी को नहीं पता था की ये पार्टी इतनी जल्दी भारतीयों दिलों को जितने वाली है।
  • 1980 लाल कृष्ण आडवाणी के नेतत्व में इस जनता पार्टी का नाम बदलकर भारतीय जनता पार्टी रख दिया जिसके 5 सालों तक अटल जी अध्यक्ष रहें।
  • 1984 अटल जी समाज में अपनी एक नई पहचान बना ली थी। 1984 के चुनाव में उन्होंने खली 2 सीट हरी थी

प्रधानमंत्री बनने का सफर 

  • 1996 में कांग्रेस पार्टी को हराने का दम रखने वाली पार्टी थी भारतीय जनता पार्टी बीजेपी 1996 में चुनाव हुए अटल जी विपक्ष पार्टी से गठबंधन करके प्रधानमंत्री बने लेकिन विपक्ष पार्टी का लम्बे समय तक साथ नहीं मिला केवल 13 दिनों के अंदर पार्टी गिर गई उसके बाद अटल जी को प्रधानमंत्री की कुर्सी से इस्तीफा देना पड़ा।
  • 1996 के बाद भी दो बार सरकार बनी लेकिन विपक्ष योगदान ना मिलने से सरकार गिर गई। तभी भी बीजेपी  प्रमुखता कम नहीं हुई थी।
  • 1998 के आम चुनावों में सहयोगी पार्टियों के साथ लोकसभा में उन्होंने बहुमत सिद्ध किया और इस तरह एक बार फिर प्रधानमंत्री बने। लेकिन एआईएडीएमके द्वारा गठबंधन से समर्थन वापस ले लेने के बाद उनकी सरकार गिर गई और एक बार फिर आम चुनाव हुए।
  • 1999 में हुए चुनाव राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साझा घोषणापत्र पर लड़े गए और इन चुनावों में वाजपेयी के नेतृत्व को एक प्रमुख मुद्दा बनाया गया। इस गठबंधन को बहुमत हासिल हुआ और अटल बिहारी वाजपेयी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली।
  • बीजेपी  पार्टी ने पहली बार 5 साल पुरे किये। देश की आर्थिक व्यवस्था से लेकर देश की शिक्षा में बहुत सुधार किये अटल जी ने।
  • अटल जी ने 2005 में राजनिति से सन्यास ले लिया।

भारत रत्न सम्मान 

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी  ने दिनांक 27 मार्च 2015  को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उनके घर जाकर भारत रत्न से सम्मानित किया। वाजपेयी जी के स्वास्थ्य को देखते हुए राष्ट्रपति ने उनके घर जाकर देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया।

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