गुरु पर्व पर निबंध

आज के दिन सिख समुदाय के लिए बहुत बड़ा दिन है। गुरु पर्व 2018 यानी की आज कार्तिक पूर्णिमा वाले दिन गुरु नानक जी की जयंती के रुप में बड़े उल्लास के साथ मानाया जाता है। गुरु नानक जयंती को गुुरुपूरब और गुरु पर्व के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन गुरुओं को सर्पित होता है। इस आर्टिकल में आपको गुरु पर्व के बारे में, गुरु पर्व क्यों मनाया जाता है के बारे में पता चलेगा। यह उत्सव सिख समुदाय के लोगों के लिए दीवाली के उत्सव की तरह मनाया जाता है। गुरु नानक जी का जीवन महान कार्यों के कारण याद किया जाता है। इनके संदेश हमेशा से प्रेम, ज्ञान, सच्चाई से जुड़े होते थे। इनके महान संदेशों को आज तक याद किया जाता है। गुरु पर्व इन हिंदी में पढ़ने के लिए आप यह आर्टिकल पूरा पढ़ सकते हैं।

गुरु पर्व पर निबंध (ESSAY ON GURU PURAB )

इनका जन्म गांव तलवंडी, शेडखुपुरा डिस्ट्रिक, पंजाब में हुआ था। यह गांव आज के दिन पंजाब, पाकिस्तान में है। और हर साल कार्तिक पूर्णिमा का दिन गुरुनानक दिवस के रुप में मनाया जाता है। गुरु नानक जी अपने कई महान कार्यों के लिए जाने जाते हैं। गुरु नानक जी को विश्व भर में सांप्रायिक एकता, सच्चाई, शांति, सदभाव के ज्ञान को बांटने के याद किया जाता है। साथ ही सिख समुदाय की नीव को रखने का क्षेय में गुरु नानक जी को दिया जाता है। गुरु नानक जी की मृतयु 22 सितंबर, 1539 को करतारपुर, मुगल साम्राज्य, पाकिस्तान में हुई थी। गुरु पर्व पर निबंध आप यहां से देख सकते हैं।

गुरु नानक जी का जीवन

गुरु नानक जी का जीवन हमेशा महान कार्यों के लिए जाना जाता है। और आज भी लोग उनकी दी गई सीख पर चलने की कोशिश करते हैं। गुरु नानक जी के पिता का नाम बाबा कालूचंद बेदी और माता का नाम त्रिपती था। इनके माता – पिता जी ने ही इनका नाम नानक रखा था। नानक जी के पिता गांव में स्थानीय राजस्व प्रशासन के अधिकारी थे।

गुरु नानक जी बचपन से ही बुद्धिमान थे। बचपन में ही नानक जी ने कई भाषाओं का ज्ञान प्राप्त कर लिया था। छोटे से ही नानक जी को फारसी और अरबी भाषा का बहुत अच्छा ज्ञान था। साल 1485 में नानक जी ने दौलत खान लोधी के स्टोर में अधिकारी के रुप में नियुक्ति ली। नानक जी का विवाह साल 1487 में हुआ था। शादी के बाद उनके उनको दो पुत्र हुए। पहला पुत्र उनका 1491 में हुआ और दूसरा पुत्र उन्हें 1496 में हुआ।

गुरु नानक जी के जीवन का उद्देश्य

यह तो हम सबको पता है कि गुरु नानक जी अपने महान उद्देश्य के ज्ञान के कारण भी जाने जाते है। क्या आपको यह पता है कि पूरी दुनिया को अपने उद्देश्य के बारे में बताने के लिए गुरु नानक जी ने अपना घर छोड़ दिया था। घर छोड़कर गुरु नानक जी अपने सिद्धांत और नियमों का प्रचार करने के लिए निकल गए थे। और एक सन्यासी का रुप धारण कर लिया था। अपने उद्देश्य से गुरु नानक जी ने कमजोर लोगों की मदद के लिए खूब प्रचार किया। साथ ही गुरु नानक जी ने भेद, मूर्ति पूजा और धार्मिक विश्वासों के खिलाफ अपने प्रचार को आगे बढ़ाया। उन्होंने अपने विचारों को फैलाने के लिए कई हिंदू और मुसलिम धर्म के स्थानों पर यात्रा की।

गुरु नानक जी की जीवन की यात्रा 25 साल तक चली। इन 25 सालों में गुरु नानक जी ने अपने उद्देश्य का बढ़ चढ़कर प्रचार किया। और आखिरी में श्री गुरु नानक देव जी ने अपनी यात्रा 25 साल खत्म कर दी। और नानक जी करतारपुर नाम के गांव जो पंजाब में स्थित है, वहां पर रहने लगे। और बाद में इसी जगह गुरु नानक जी ने अपनी आखिरी सांस ली। गुरु नानक जी की मृतयु के 12 साल बाद भाई गुरुदास का जन्म हुआ। जो अपने बचपन से ही सिख मिशन से जुड़ गए। इन्होंने सिख समुदाय के लिए काफी कुछ किया। जैसे कि जगह – जगह सिख समुदाय बनाए और धर्मशालाएं भी खोली।

गुरु नानक जी के अनमोल वचन

  1. न कोई हिंदू है न कोई मुसलमान है – सभी मनुष्य हैं, सभी समान हैं।
  2. मोह को जलाकर और उसे घिसकर स्याही बनाओ, बुद्धि को श्रेष्ठ कागज़ बनाओ। प्रेम को कलम बनाओ और चित्त को लेखक।
  3. जो व्यक्ति परिश्रम करके कमाता है, अपनी कमाई में से कुछ दान करता है, वह वास्तविक मार्ग ढूंढ लेता है।
  4. जो असत्य बोलता है, वह गंदगी खाता है, जो स्वयं भ्रम में पड़ा हुआ है, वह दूसरे को सत्य बोलने का उपदेश कैसे दे सकता है।
  5. यदि मनुष्य को सच्चा गुरु मिल गया तो उसका मन भटकना छोड़ देता है। उसके अंदर की सरिता बह निकलती है।
  6. सच पर चलने से दिल स्वच्छ हो जाता है और आत्मा पर से झूठ का मैल धुल जाता है।
  7. जिनका तन, मन, आत्मा और वाणी सभी झूठ स लिप्त है,वे कैसे शुद्ध या पवित्र होंगे।
  8. ऐसे लोग जिनका मुंह और जीभ स्वच्छ और शुद्ध है, वे अनेक व्यक्तियों को स्वच्छ और शुद्ध बना देते हैं।
  9. ईश्वर स्मरण में गुरु की सहायता आवश्यक है। इसलिए गुरु का सम्मान और वंदन करें।
  10. यदि तू  मस्तिष्क को शांत रख सकता है तो तू विश्व पर विजय होगा।
  11. संतो के सत्य वचनों को सुन, क्योंकि संत वही है जो वे प्रत्यक्ष देख चुके हैं।
  12. जो शरीर में देवता का निवास कर देता है, वही गुरु है।
  13. ईश्वर एक ही है।
  14. एक ही ईश्वर की उपासना करनी चाहिए।
  15. ईश्वर, हर जगह व हर प्राणी में मौजूद है।
  16. ईश्वर की शरण में आए भक्तों को किसी प्रकार का डर नहीं होता।
  17. सभी मनुष्य एक समान हैं, चाहे वे सत्री हो या पुरुष।
  18. शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भोजन आवश्यक है, लेकिन लोभी व लालची आचरण से बचें रहें।
  19. किसी भी निर्दोष जीव या जन्तु को सताना नहीं होना चाहिए।
  20. हमेशा खुश रहना चाहिए।

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