नमस्कार दोस्तों,

मई के दूसरे रविवार को हम मात्र दिवस के रूप में मानते हैं ऐसे तो माँ के लिए साल के 365 दिन भी न्योछावर कर दिए जाए तब भी कम हैं लेकिन काम से काम इस दिवस पर अपनी अपनी माओं को स्पेशल फील करा सकते हैं उन्हें बता सकते हैं हैं कि वह हमारी ज़िन्दगी का एक जरुरी हिस्सा हैं उनके बिना हम कुछ भी नहीं। आज हम आप सभी के लिए मात्र दिवस पर निबंध या मात्र दिवस पर कविता हमारे इस पेज से प्राप्त कर सकते हैं।

माँ एक छोटा सा शब्द लेकिन अपने अंदर हज़ारों सीख छुपाये बैठा है। माँ जो एक औरत का रूप होती है जो वक़्त आने पर कभी दुर्गा , कभी काली तो कभी सावित्री बन जाती है। वैसे तो इस सृष्टि का निर्माण भगवन ने किया पर उसने सबसे पहले माँ बनायीं माँ का अस्तित्व न कभी काम था न कभी होगा। माँ का जीवन अपने आप में एक कहानी है हम सब कुछ भी कर लें माँ के बराबर नहीं पहुँच सकते।

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माँ हमे पैदा करती है एक नयी दुनिया दिखती है अपने लाड़ प्यार से हमे नहलाती है। हमें कोई भी परेशानी हो भागी चली आती है अपनी संतान के लिए सबसे लड़ जाती है लेकिन अगर हमारी गलती हो तो हमे डाँटती भी है वही हमे जीवन की अछि बुरी चीजों से सामना करवाती है। खुद चाहे पढ़ी लिखी ना हो फिर भी ज़िन्दगी की बहुत सी चीज़ो का ज्ञान सिर्फ हमे वही कराती है कभी पापा की डाँट से बचाती है तो कभी चुपके से हमे पसंद हो वो चीज खिलाती है।

हमारी सबसे पहली शिक्षक हमारी माँ ही होती है , रिश्तों की परिभाषा हमे वही समझाती है साथ में अदब का पाठ भी पढ़ाती है  हम गलत रास्ते पर ना जाये इसके लिए हमे हर मुश्किल से लड़ना सिखाती है। ऐसी हर माँ को करते हैं हम प्रणाम तुम रहो हमेशा स्वस्थ क्योंकि तम में बस्ती है हम सबकी जान।

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