माता और पिता यह दोनों ही हमारी ज़िन्दगी के दो अटूट हिस्से ये हैं तो जीवन है ये नहीं तो सब अधूरा सा लगता है इनके लिए जो कहा जाए कम है जो लिखा जाए कम है चुकि हर दिन तो माँ के लिए ही समर्पित है लेकिन मदर्स डे पर चाहते हैं कि हम ये दिन उनके लिए खास बनाये ऐसे ही खास मौको के लिए हम लेकर आये है मात्र दिवस पर पोएम (कविता) और कुछ शायरी जिसे आप अपनी माँ के साथ बाँट सकते हैं भले ही शब्द हमारे हैं पर अहसास सबके एक से ही है।

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मदर्स डे – माँ के लिए कविता

इस वर्ष माँ के लिए एक कविता जिसे सुना कर आप अपनी माँ को धन्यवाद दे सकते हो। वैसे तो माँ को कभी भी धन्यवाद नहीं किया जा सकता लेकिन हम अपनी तरफ से कोशिश तो कर ही सकते हैं। माँ एक ऐसा शब्द जिस के आगे लाखो-करोड़ो शब्द कम पड़ जाएँ। माँ के नाम हम Aglasem की एक छोटी सी कोशिश।

नौ महीने अपने अंदर रखकर,
जाने कैसा एहसास जगाया,
हर दिन हर पल की हलचलों को,
बिन कहे हर किसी से छुपाया,
कितना दर्द तूने सहा होगा माँ,
इसका कुछ अंदाज़ा भी नहीं है,
जब आया मै इस दुनिया में,
तूने फिर सब भुलाकर मुझे सीने से लगाया।

जब मै बड़ा हुआ , तूने चलना सिखाया,
जब मै बाहर निकला , तूने दौड़ना सिखाया,
मै कहीं पीछे न रह जाऊ तूने खुद को भी मेरे साथ तपाया,
अब जब मै आगे निकल आया , क्यों तुझे अपने साथ ना ला पाया।

खुद गीले में तू सोई, मुझे सूखे में सुलाया,
क्यों मेरी हल्कि सी परेशानी में तूने खुद को हर जगह दौड़ाया,
मै तब भी परेशान था क्योकि हर जगह तू चाहिए थी,
मै आज भी परेशान हूँ क्योंकि मै तेरे लिए कुछ ना कर पाया।

माँ तुझे नमन है तू मुझे इस दुनिया में लायी,
अपनी खून-पसीने की कमाई सब मुझ पर लगायी,
मै तेरा आधा भी बन जाऊ बस इतनी है दुआ,
तुझे दुनिया की हर ख़ुशी दे जाऊ बस क़ुबूल हो ये दुआ।


मदर्स डे के लिए कुछ शायरी और सबके पसंदीदा कोट्स आप यहाँ से देख सकते है 

माँ की ममता का दीदार हम कभी समझ न पाएंगे
उसकी प्यार की कीमत के आगे शायद हम खुद बिक जायेंगे।

जब – जब ज़िन्दगी में परेशानियाँ आयी
माँ ने ऊँगली थामकर हर नइया पार लगायी।

जिसकी खुशियों की गिनती में उसका नाम नहीं होता
वह माँ ही है जिसकी ज़िन्दगी में कभी आराम नहीं होता।

जिसने हमे हवाई – जहाज़ चलाने तक का भरोसा दिलाया
यह वही माँ है जिसने कभी खुद कुछ न चलाया।

जिसके लबों पर कभी बद्दुआ नहीं होती
एक माँ ही है जो कभी खफा नहीं होती।

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