केंद्रीय कैबिनेट ने हाल ही में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) विधेयक, 2017 को मंजूरी दे दी है, जो कि मौजूदा भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) द्वारा नियामक चिकित्सीय शिक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक नए निकाय के साथ बदलने का प्रयास कर रही है। कानून और न्याय मंत्री रवि शंकर प्रसाद के अनुसार, पूरी चिकित्सा व्यवस्था तंत्र को ठीक करने के लिए इस विधेयक को पारित की जा रही है। वर्तमान में, एमसीआई ही भारत में मेडिकल शिक्षा के लिए सभी प्रकार के नियमों और मानकों का गठन करने का अधिकार रखता है, लेकिन इस प्रस्तावित बिल की शुरुआत के साथ, एमसीआई को एक नए आयोग के साथ बदल दिया जाएगा।

नीति आयोग द्वारा गठित कमेटी के द्वारा पारित एनएमसी (नेशनल मेडिकल कॉउंसिल) विधेयक के लागू होते ही भारतीय चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत सारे परिवर्तन देखने को मिलेंगे। इस प्रारूपिक विधेयक के खिलाफ भारत के सबसे बड़े डॉक्टरों के समूह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन(आईएमए) विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और इस प्रस्तावित एनएमसी बिल के वापसी की मांग करते हुए दावा किया कि यह मेडिकल पेशे को अपंग कर देगा।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी)

नेशनल मेडिकल कमीशन(एनएमसी), केंद्रीय कैबिनेट के द्वारा पारित प्रस्तावित विधेयक है, जिसके लागू होते ही चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत सारे परिवर्तन देखने को मिल सकता है। केंद्रीय कैबिनेट ने इस बिल को अपनी मंजूरी दे दी है। अभी इस बिल को लागू करने के लिए लोक सभा और राज्य सभा की मंजूरी की आवश्यकता है। लोक सभा और राज्य सभा से बिल को मंजूरी मिलते है मेडिकल कॉउंसिल ऑफ़ इंडिया(एमसीआई) को भंग कर दिया जायेगा और नए विधेयक नेशनल मेडिकल कमीशन(एनएमसी) को लागू कर दिया जायेगा।

क्या है भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई)?

भारतीय चिकित्सा परिषद या मेडिकल कॉउंसिल ऑफ़ इंडिया (एमसीआई) वर्तमान समय में भारतीय चिकित्सा के क्षेत्र में सर्वोपरि संस्थान है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को 1934 में भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1933 के तहत स्थापित किया गया था। इसे 1964, 1993 और 2001 में संशोधित किया गया था। एमसीआई भारत में स्नातक और उच्च स्तरीय चिकित्सीय शिक्षा को विनियमित करता है। लेकिन वर्तमान समय में एमसीआई, चिकित्सीय शिक्षा को नियमित करने वाला ही उल्लंघन कर्ता बन गया है। आज के समय में एमसीआई देश का सबसे भ्रष्ट संस्थान बन चुका है। एमसीआई का संचालन भ्रष्ट निजी डॉक्टर के द्वारा किया जा रहा है, इन भ्रष्टाचारियों के कारण ही एमसीआई की स्तिथि ख़राब हो गयी है।

भारत में जनसंख्या के हिसाब से डॉक्टर और जनसँख्या के बीच का अनुपात बहुत ही ज्यादा है, इस अनुपात को कम करने के लिए मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया की स्थापना की गयी थी लेकिन एमसीआई इस अनुपात को कम करने में असफल रही। आज के समय में भारतीय चिकित्सीय स्तिथि बहुत ही ख़राब हो रही है, अभी हाल की ही खबर थी की डॉक्टर रुपयों के लालच में मृत व्यक्तियों के इलाज भी कर रहे थे, इलाज के लिए रुपयों की लूट आज के समय में आम हो गयी है। यह तक की मेडिकल परीक्षा के लिए भी लोग घूस ले रहे है। इन सबको खत्म करने के लिए ही एनएमसी बिल को लाने की पेशकस की गयी है।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के सदस्य

एमसीआई में सिर्फ एक अध्यक्ष होता है, जो की कोई निजी डॉक्टर होता है , लेकिन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग या नेशनल मेडिकल कमीशन(एनएमसी) में 25 सदस्यों का एक समूह होगा जो की भारतीय चिकित्सा के क्षेत्र में विकास के लिए कार्य करेगा। इन सदस्यों में एक अध्यक्ष होगा जो की केंद्र के द्वारा निर्वाचित किया जायेगा और एक सचिव होगा। इन 25 सदस्यीय समूह में 16 सदस्य चिकित्स्कीय पेशे से होंगे उन में से भी 4 सदस्य देश के अच्छे चिकित्सा संस्थानों जैसे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् के प्रेसिडेंट होंगे, बाकी के सदस्य पार्ट टाइम सदस्य होंगे।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के कार्य

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के केंद्र में लागू होते ही चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत सारे बदलाव देखने को मिल सकते हैं। एनएमसी का काम चिकित्सा पद्धति को लोगो के लिए और सुयोग्य बनाने का होगा। अखिल भारतीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा का आयोजन भी एनएमसी के द्वारा ही किया जायेगा तो उम्मीद की जा रही की इस विधेयक के केंद्र में आते ही मेडिकल परीक्षा का प्रारूप भी बदल सकता है। ये विधेयक डॉक्टरों के काम करने के तरीकों पर भी नज़र रखेगा। आयोग ने दावा किया है की इस बिल के पारित होते ही देश के मेडिकल सिस्टम में सुधर होगा। चिकित्सा के क्षेत्र में हो रही खुली लूट बंद हो जाएगी और आम लोगो के लिए भी इलाज़ उनकी पहुंच में होगा।

प्रस्तावित बिल राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के तहत स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा मूल्यांकन और चिकित्सा संस्थानों के प्रत्यायन और चिकित्सकों के पंजीकरण के संचालन के लिए स्वायत्त चार बोर्डों के गठन के द्वारा होगा।

राष्ट्रीय मेडिकल कमीशन बिल में निजी कॉलेजों और डीम्ड यूनिवर्सिटी में 40% तक की फीस को दिशानिर्देश तैयार करने की शक्ति होगी। तथा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग में एक सामान्य प्रवेश परीक्षा और licentiate परीक्षा का प्रस्ताव है जिसके माध्यम से सभी मेडिकल स्नातकों को अभ्यास करने के लिए लाइसेंस मिलेगा। इस के द्वारा झोलाक्षाप डॉक्टरों पर लगाम लग सकेगी।

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