आरआरबी एफएक्यू

रेलवे भर्ती बोर्ड के द्वारा कई परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है। बता दें कि आरआरबी द्वारा आयोजित होने वाली परीक्षाओं का परिणाम नॉर्मलाइज्ड होता है। नॉर्मलाइजेड स्कोर को ले कर उम्मीदवारों के मन में कई सवाल उठते हैं। कई उम्मीदवारों को तो नॉर्मलाइजेड स्कोर के बारे में पता ही नहीं होता है। नॉर्मलाइजेड स्कोर क्यों निकला जाता है, इसे कैसे निकला जाता है, नॉर्मलाइजेड स्कोर और रॉ स्कोर में अंतर होता है या नहीं आदि सवाल हैं जिनके जवाब हम इस पोस्ट के माध्यम से ले कर आए हैं। इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए आप इस पोस्ट को पूरा पढ़ सकते हैं।

प्रश्न : परीक्षा कई सत्रों में क्यों आयोजित की जाती है ?

उत्तर : आरआरबी की परीक्षाओं की तरफ बड़ी संख्या में उम्मीदवार आकर्षित होते हैं और आवेदन करते हैं। इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के लिए परीक्षा आयोजित करने में होने वाली परेशानियों से बचने के लिए आरआरबी कई सत्रों में परीक्षा आयोजित करता है। उदाहरण के लिए, CEN 02.2018 लेवल 1 पद के लिए ने 1.89 करोड़ उम्मीदवारों को आकर्षित किया था इसलिए इस परीक्षा को 153 सत्रों में आयोजित किया गया था।

प्रश्न : नॉर्मलाइजेशन (सामान्यीकरण) क्यों आवश्यक है?

उत्तर : जब एक ही सिलेबस के लिए कई परीक्षाएं आयोजित की जाती है तब सभी प्रयासों के बाद भी अलग – अलग सत्रों के डिफिकल्टी लेवल (कठिनाई स्तर) में भिन्नता की संभावना होती है। इस कारण उम्मीदवारों के स्कोर में भिन्नता होती है। इस भिन्नता को बराबर करने के लिए अंकों का नॉर्मलाइजेशन करना आवश्यक होता है।

प्रश्न : आरआरबी ने पहले भी कई सत्रों में परीक्षाएं आयोजित की हैं। क्या पहले भी नॉर्मलाइजेशन अपनाया जा रहा था ?

उत्तर : हां, वर्ष 2000से आरआरबी द्वारा कई सत्रों में आयोजित होने वाली परीक्षाओं में नॉर्मलाइजेशन किया जा रहा है।

प्रश्न : क्या नॉर्मलाइजेशन को ग्रेस मार्क्स की तरह है ?

उत्तर : नहीं, आरआरबी द्वारा नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया एक वैज्ञानिक और सांख्यिकीय (स्टैटिस्टिकल) प्रक्रिया है। यह ग्रेस मार्क्स की तरह नहीं है।

प्रश्न : परीक्षा में प्राप्त अंकों की तुलना में क्या नॉर्मलाइजेशन में प्राप्त अंकों में कमी के साथ वृद्धि हो सकती है ?

उत्तर : हां,

प्रश्न : इसका मतलब यह है कि उम्मीदवारों का प्रदर्शन उन सभी उम्मीदवारों के आधार पर
सांख्यिकीय (नॉर्मलाइजेशन) रूप से आंका जाता है जिनसे वह प्रतिस्पर्धा कर रहा है ? 

उत्तर : हां,

प्रश्न : रॉ स्कोर क्या होता है ? रॉ स्कोर कैसे निकाला जाता है ?

उत्तर : रॉ नंबर निकालने की प्रक्रिया निम्न प्रकार है :

प्रश्नों की कुल संख्या : 100; छोड़े गए प्रश्नों की संख्या (गलत प्रश्न, एक से ज्यादा सही उत्तर, आदि) : 2
हल किये प्रश्नों की संख्या : 60; सही जवाब :54; गलत जवाब : 6
पॉजिटिव अंक : 54; नकारात्मक अंक : 2; नेट स्कोर : 54 – 2 = 52
100 में से स्कोर : (52 / 98)*100 = 53.06
रॉ स्कोर : 53.06

प्रश्न : इसका मतलब यह है कि इसमें मानवीय हस्तक्षेप शामिल नहीं है?

उत्तर : हां, यह पूरी तरह से उम्मीदवारों के औसत (रॉ) स्कोर के मापदंडों की गणना मूल्यों पर आधारित है,

प्रश्न : क्या नॉर्मलाइजेशन के बाद एक ही सत्र के उम्मीदवारों के अंकों में वृद्धि / कमी में बदलाव हो सकते हैं ? 

उत्तर : हां, ऐसा इसलिए हो सकता है क्यूंकि सभी उम्मीदवारों का रॉ स्कोर अलग होता है।नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया में उम्मीदवार का रॉ स्कोर भी शामिल होता है। इसलिए एक उम्मीदवार के अंकों की कमी / वृद्धि उस सेशन के दूसरे उम्मीदवार के अंकों की कमी / वृद्धि से अलग हो सकती है।

प्रश्न : लेकिन कई उम्मीदवारों ने 100 से अधिक अंक प्राप्त किए हैं?

उत्तर : हां, नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया में ऐसा संभव है कि कठिन सेशन में भी बहुत अच्छा अंक प्राप्त किया जा सकता है। मान लें कि किसी उम्मीदवार ने बहुत कठिन सेशन में भाग लिया है फिर भी उसे 90 जैसे अच्छे अंक प्राप्त हुए हैं। नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया में

प्रश्न : क्या यह पहली बार है जब उम्मीदवारों को 100 से अधिक नॉर्मलाइज अंक मिले हैं? 

उत्तर : नहीं, पिछले आरआरबी परीक्षाओं में भी, कुछ उम्मीदवारों को 100 से अधिक अंक मिले थे।

प्रश्न : क्या CEN 02/2018 के लिए नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया / फार्मूला में कोई बदलाव है?

उत्तर : नहीं, CEN 02/2018 में अपनाई गई नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रया वर्ष 2000 से आरआरबी की परीक्षाओं में हुई नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रियाओं की तरह ही है। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

प्रश्न : CEN 02/2018 में होने वाली नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया क्या है?

उत्तर : आरआरबी के द्वारा अपनाई जाने वाली नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया निम्न प्रकार है :

Xn= (S2/S1) (X-Xav) + Yav

जहां
Xn= उम्मीदवार का नॉर्मलाइज्ड स्कोर
S2= बेस सेशन के रॉ मार्क्स का स्टैण्डर्ड डेविएशन
S1= कैंडिडेट सेशन के रॉ मार्क्स का स्टैण्डर्ड डेविएशन
X= उम्मीदवार का रॉ मार्क्स जिसको नॉर्मलाइज करना है
Xav= उम्मीदवार के रॉ मार्क्स का एवरेज
Yav= रॉ मार्क्स के बेस सेशन का एवरेज

प्रश्न : क्या आप इस प्रक्रिया को स्पष्ट करने के लिए कुछ उदाहरण दे सकते हैं? 

उत्तर : 9 सत्रों में आयोजित की जाने वाली परीक्षा पर विचार करें तो उस सत्र का स्टैटिस्टिकल पैरामीटर इस प्रकार है :

सेशन (सत्र) संख्या मीन ऑफ रॉ मार्क्स स्टैण्डर्ड डिवीजन ऑफ रॉ मार्क्स
1 29.28 16.33
2 26.62 14.75
3 26.45 16.37
4 25.94 15.16
5 27.37 15.18
6 32.05 15.82
7 38.32 18.32
8 21.31 12.68
9 33.02 17.61

सेक्शन नंबर 7 को मीन ऑफ रॉ मार्क्स के आधार पर बेस सेक्शन लिया गया है।

उदाहरण 1 :सत्र 8 के एक उम्मीदवार पर विचार करें, जिसके रॉ अंक 75 हैं। 

यहां : S2 = 18.32, S1 = 12.68, Xav = 21.31, Yav = 38.32, X = 75

ऊपर दिए गए फार्मूला के आधार पर नॉर्मलाइज्ड अंक :

Xn = (S2/S1) (X-Xav) + Yav
= (18.32/12.68)(75-21.31)+38.32
= 115.89

उदाहरण 2 : सत्र 8 के एक उम्मीदवार का दूसरा उदाहरण लेते हुए, जिसका रॉ अंक 35 है

यहां : S2 = 18.32, S1 = 12.68, Xav = 21.31, Yav = 38.32, X = 35

ऊपर दिए गए फार्मूला के आधार पर नॉर्मलाइज्ड अंक :

Xn

= (S2/S1) (X-Xav) + Yav
= (18.32/12.68)(35-21.31)+38.32
= 58.09

उदाहरण 3 : सत्र 9 के उम्मीदवार का उदाहरण लें, जिनका रॉ अंक 35 है 

यहां : S2 = 18.32, S1 = 17.61, Xav = 33.02, Yav = 38.32, X = 35

ऊपर दिए गए फार्मूला के आधार पर नॉर्मलाइज्ड अंक :

Xn

= (S2/S1) (X-Xav) + Yav
= (18.32/17.61)(35-33.02)+38.32
= 40.37

उदाहरण 4 : सत्र 7 के उम्मीदवार का उदाहरण लें, जिनका रॉ अंक 40 है 

यहां : S2 = 18.32, S1 = 18.32, Xav = 38.32, Yav = 38.32, X = 40

ऊपर दिए गए फार्मूला के आधार पर नॉर्मलाइज्ड अंक :

Xn

= (S2/S1) (X-Xav) + Yav
= (18.32/18.32)(40-38.32)+38.32
= 40 (i.e. No change)

उदाहरण 5 : सत्र 7 के उम्मीदवार का उदाहरण लें, जिनका रॉ अंक 40 है 

यहां : S2 = 18.32, S1 = 17.61, Xav = 33.02, Yav = 38.32, X = 23

ऊपर दिए गए फार्मूला के आधार पर नॉर्मलाइज्ड अंक :

Xn

= (S2/S1) (X-Xav) + Yav
= (18.32/17.61)(23-33.02)+38.32
= 27.89

उदाहरण 6 : सत्र 7 के उम्मीदवार का उदाहरण लें, जिनका रॉ अंक 40 है>

यहां : S2 = 18.32, S1 = 17.61, Xav = 33.02, Yav = 38.32, X = 23

ऊपर दिए गए फार्मूला के आधार पर नॉर्मलाइज्ड अंक :

Xn

= (S2/S1) (X-Xav) + Yav
= (18.32/17.61)(23-33.02)+38.32
= 27.89

प्रश्न : क्या नॉर्मलाइज्ड स्कोर रॉ स्कोर से कम हो सकता है ?

उत्तर : हां, कुछ परिस्थियों में ऐसा हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि बेस सेशन का एसडी और मीन क्रमशः 18.80 और 42.28 है, और उम्मीदवार के सत्र का एसडी और मीन 19.9 और 41.62 है; 75 के रॉ स्करव के लिए नॉर्मलाइजेड स्कोर होगा :

=(18.80/19.9)(75-41.62)+42.28= 73.81

प्रश्न : इसका मतलब है कि सामान्यीकरण प्रक्रिया पूरी तरह से स्टेटिस्टिक्स / मैथेमेटिकल है और यहां कोई भी मानव हस्तक्षेप नहीं है ?

उत्तर : हां, यह पूरी तरह से स्टेटिस्टिक्स / मैथेमेटिकल है और यहां कोई भी मानव हस्तक्षेप नहीं है।

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