मामला अजमेर नगर निगम द्वारा निकाली गई सफ़ाईकर्मी भर्ती से जुड़ा हुआ है। अजमेर नगर निगम ने 2012 सफाईकर्मी भर्ती परीक्षा के सभी अभ्यार्थियों की ओर से पेश किये गए दस्तावेजों को फ़र्जी क़रार दिया है। जबकि हाईकोर्ट ने इस मामले पर हैरानी जताते हुए कहा कि सभी अभ्यार्थियों के दस्तावेजों का फर्जी होना संभव नहीं है। इस मामले में याचिकाकर्ता ने कहा कि  नगर निगम ने कोर्ट की अवमानना करते हुए नई भर्ती निकाली हैं। कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख़ अपनाते हुए कहा कि गलती करने वालों को जेल की हवा खानी होगी।  हालांकि कोर्ट ने इस बाबत कोई लिखित टिप्पणी नहीं की है। कोर्ट ने केवल मौखिक रूप से ऐसा कहा है।

 राजस्थान सफ़ाईकर्मी भर्ती जमा हुए फर्जी दस्तावेजों पर हाईकोर्ट ने सुनाया अपना ये फैसला

आपको बता दें कि इस मामले में याचिकाकर्ता महेन्द्र संगत की याचिका पर मुख्य न्यायधीश मोहम्मद रफ़ीक़ व न्यायधीश गोवर्धन बाढ़दार ने गुरुवार को सुनवाई की। सुनवाई के दौरान प्रार्थीपक्ष के अधिवक्ता विमल चौधरी ने कोर्ट को बताया कि सफाईकर्मी भर्ती 2012 के तहत अजमेर ने दो सप्ताह के अंदर नियुक्ति देने को कहा था, लेकिन निगम ने ऐसा न करके नई भर्ती निकाल दीं। इसका कारण बताते हुए निगम ने बताया कि निगम ने सभी अभ्यार्थियों के दस्तावेजों को फ़र्जी पाया है इस कारण 182 अभ्यार्थियों में से कोई भी भर्ती के योग्य नहीं है। कोर्ट इस मामले में अब चार सप्ताह बाद सुनवाई करेगी।

आपको बता दें कि अजमेर नगर निगम ने 2012 में  756 सफाईकर्मियों के पद पर भर्ती निकाली थी, जिसमें दो साल का कार्यअनुभव मांगा था। इस भर्ती के ज़रिए 182 अभ्यार्थियों का चयन किया गया था, लेकिन भर्ती को स्थाई निकाय निदेशक ने 30 सितंबर 2014 के आदेश से नियुक्तियों को यह कहकर रद्द कर दिया गया कि चयनित अभ्यार्थियों ने फर्जी दस्तावेज पेश किये हैं। इस मामले को याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की कोर्ट में सुनवाई जारी है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद शुरू होगी।

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