संघ लोक सेवा आयोग जिसमें जाकर देश की सेवा करने का सपना देश का हर दूसरा इंसान देखता है ,और जिसे देश की सबसे कठिन परीक्षा कहा जाता है का 2017 – 18 का परिणाम घोषित हो गया है देश के लाखों युवाओं में से 990 युवाओं का चयन हुआ है , इन 990 युवाओं की सफलता की कहानी अपने आप में बहुत अलग होती है होते तो ये सब हम में से एक ही हैं पर कहीं ना कहीं ये हम सब से अलग ही होते हैं क्योंकि इनमें वो ज़ज़्बा होता है , वो मेहनत करने की लगन और सबसे बड़ी चीज जिसे हम लोग अक्सर भूल जाते हैं वो है खुद पर भरोसा होता है जरुरी नहीं ये पहली बार में ही सफल हो जाये पर जरुरी ये है कि ये लोग हार नहीं मानते।

आज हम ऐसे ही दो जाबांजो की सफलता की कहानियाँ लेकर आये हैं , जो भी छात्र यूपीएससी के लिए पढ़ रहे हैं या जो एक दो असफलता मिलने से निराश हो गए है उनके लिए आज का यह आर्टिकल बहुत जरुरी है इस आर्टिकल में हम आपको दो महिलाओं के बारे में बताने जा रहें है जिसमे से एक ने न सिर्फ अपने ससुराल , अपने पति और अपने 4 साल के बच्चे की जिम्मेदारियों के बाबजूद संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा ना केवल पास की बल्कि पूरे देश में दूसरे (2) नंबर पर आयी।

वही अगर दूसरी महिला की बात की जाए इन्हे सुनने में परेशानी है फिर भी यह ना रुकी और लगी रही अपने सपने की ओर और इन्होने अपना मुकाम पहले ही प्रयास में पा लिया और पुरे देश में नौवें नंबर पर आकर सबका सर गर्व से ऊँचा कर दिया। आइये अब इनकी सफलता की कहानियाँ पूरे विस्तार से बात बात करते हैं और आपको देते है परीक्षा में सफलता के जरुरी टिप्स।

हरियाणा की रहने वाली हैं अनु कुमारी

अनु कुमारी जिन्होंने देश में दूसरा और महिलाओं में पहला स्थान प्राप्त किया वे हरियाणा की मूल निवासी हैं वे एक मामूली घर को बिलोंग करती हैं लेकिन उनका ज़ज़्बा है जो उन्हें सबसे खास बनता है। हरयाणा एक ऐसा प्रदेश हैं जहाँ आज भी लड़कियों के लिए बहुत सारी चीजे आसान नहीं हैं ऐसे में  अनु कुमारी का शादीशुदा होना उसपर 4 साल का बच्चा ये कुछ भी आसान नहीं है इतनी सारी  ज़िम्मेदारियाँ और यूपीएससी की पढाई वाकई में इंसान में बस लग्न होनी चाहिए।

फिजिक्स में ऑनर्स है अनु कुमारी

सही पढ़ा आपने हरियाणा से स्कूलिंग पूरी करने के बाद अनु ने फिजिक्स जैसे सब्जेक्ट में ऑनर्स किया है वो भी दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज से उसके बाद भी वह ना रुकी उन्होंने फिर एमबीए किया आईएमटी नागपुर से और वहाँ से एमबीए करने के बाद उनकी नौकरी लगी।  पहली नौकरी उनकी 21 साल में लग गयी थी आईसीआईसीआई बैंक मुंबई में ,हरियाणा से दिल्ली और फिर दिल्ली से मुंबई की उड़ान भी आसान नहीं थी लेकिन वह ना रुकी उन्होंने 5 लाख पर साल पर शुरुआत की थी पर जब उन्होंने नौकरी छोड़ी तब वह 20 लाख पर साल कमेटी थी उन्होंने पूरे 9 साल तक काम किया और फिर यूपीएससी की तैयारी करने के लिए नौकरी छोड़ी।

चार साल के बेटे से रही दूर

वे बताती हैं कि उनका बेटे के साथ रहकर पढाई करना मुश्किल हो रहा था तो उन्होंने अपने सीने के टुकड़े को अपने से अलग करने का फैसला किया उन्होंने अपने बेटे को अपनी माँ के पास छोड़ दिया और खुद अपनी मौसी के यहाँ गांव में रहकर पढाई की।  चुकि आईएएस के लिए आपको नियमित रूप से अखबार पढ़ने के जरुरत होती है पर वह जहाँ रहती थी वह कोई भी अंग्रेजी अखबार नहीं आता था तो उनके एक और सलूशन निकला उन्होंने इंटरनेट पर ही पढ़ना शुरू कर दिया। अनु के सामने जो भी परेशानियां आयी उन्होंने बिना शिकायत किये उसका हल ढूंढा और अपनी तैयारी में किसी तरह की कोई कसार नहीं छोड़ी जिसका परिणाम आज हम सब के सामने हैं।वह आईआईएस बनने के बाद औरतों और बच्चों के साथ हो रहे अपराधों को ख़त्म करना चाहती हैं।

अब बात करते हैं सौम्य शर्मा की जिन्होंने पुरे देश में नौवीं रैंक हासिल की

लॉ की स्टूडेंट हैं सौम्या

सौम्य शर्मा जिन्होंने सारी मुसीबतों को पार करकर देश में नौवीं रैंक हासिल की है वह इस समय लॉ की पढाई कर रही हैं वे नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली की स्टूडेंट हैं जब उन्होंने अपनी परीक्षा दी तब वह आखिरी साल में थी और उन्होंने सारी तैयारी अपनी लॉ की पढाई के साथ पूरी की। उन्होंने लॉ के बाद आगे पढाई करने की सोची और इसके लिए वे विदेश में कई कॉलेज के एडमिशन के लिए भी सेलेक्ट हुई लेकिन पढाई करते करते उन्हें पता चला कि उनका इंटरेस्ट तो कही और हैं उन्हें रिसर्च करना , नयी जानकारियाँ प्राप्त करना और पढ़ना बहुत अच्छा लगता है तो उन्होंने कॉलेज के साथ ही यूपीएससी की परीक्षा में मौका देने का सोचा और उन्होंने तैयारी शुरू क्र दी।

सुनने में है परेशानी

सौम्य शर्मा को सुनने में थोड़ी तकलीफ होती है इस परेशानी का पता उन्हें जब वे कक्षा 11 में थी तब चला पर उन्होंने इसको अपनी कमजोरी नहीं बनाया और इसी के साथ जीना सीख लिया जहाँ हम लोग अगर छोटी सी भी चोट लग जाए उसको लेकर बैठ जाते हैं वहीं सौम्या शर्मा जैसी लड़कियाँ भी हैं जिन्होंने इतना बड़ा मुकाम हासिल किया कहते हैं डर और हिम्मत दोनों ही आपके मन में होती हैं बस आप क्या चुनते हैं वो आप पर निर्भर करता है।

ऑप्शनल सब्जेक्ट में लॉ की रही अहम भूमिका

यूपीएससी की परीक्षा में आपको अपना एक ऑप्शनल सब्जेक्ट चुनना पढता है वह पूरी तरह आपकी पसंद का हो सकता है सौम्य शर्मा ने बहुत ध्यान  रखते हुए अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट लॉ को चुना इससे उन्हें बहुत फ़ायदा हुआ क्योंकि उन्होंने स्नातक लॉ से किया है और चुकि उन्होंने अपनी पढाई पूरी शिद्धत से की है तो उन्हें लॉ में कोई मुश्किल नहीं आयी और साथ ही जब वह छोटी थी तब से ही उन्होंने अखबार पढ़ने की आदत डाल रखी थी वह नियमित रूप से अखबार पढ़ा करती थी इसीलिए एकसाथ 2-3 अखबार रोज पढ़ने में भी उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई।

बुखार में भी दी परीक्षा

जहाँ हम लोग हर छोटी सी असफलता को लेकर ही निराश हो जाते वही ऐसे बड़े बड़े दिग्गज भी हैं जिनके लिए लक्ष्यप्राप्ति से बढ़कर कुछ नहीं इन्होंने अगर एक बार कुछ ठान लिया तो फिर चाहे कितनी भी मुश्किलें आ जाए ये घबराते नहीं और न ही अपने लक्ष्य से पीछे हट्टे हैं बल्कि उन मुसीबतों को सामना करते हैं और अपने लक्ष्य को भी हासिल करते हैं। सौम्य को यूपीएससी की मेन्स की परीक्षा के समय 102 डिग्री सेल्सियस बुखार था बीच में 103 भी पहुँच जाता था इन सब के बाबजूद न सिर्फ उन्होंने परीक्षा दी बल्कि पूरे देश में नौवां स्थान भी पाया वो भी पहले ही प्रयास में।

ऊपर लिखे हुए देश की दो बहादुर और मजबूत इरादों की महिलाओं को ना सिर्फ नमन है बल्कि उनको दिल से बहुत बधाईयाँ ऐसे ही और महिलाये आये और देश की हर बेटी/महिला को कुछ करने के लिए प्रेरित करें।

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