वीर बाल दिवस पर भाषण और कविता 2026 | साहिबज़ादों पर भाषण
अपडेटेड: 14 October 2026
वीर बाल दिवस पर भाषण 2026: 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस पर स्कूलों में भाषण, कविता पाठ और प्रश्नोत्तरी जैसे कार्यक्रम होते हैं। वर्ष 2026 में वीर बाल दिवस 26 दिसंबर, शनिवार को है। यहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबज़ादों — बाबा ज़ोरावर सिंह जी और बाबा फ़तेह सिंह जी — के बलिदान पर कक्षा 1 से 12 के विद्यार्थियों के लिए छोटा और लंबा भाषण तथा वीर बाल दिवस पर कविताएँ सरल हिंदी में दी गई हैं।
वीर बाल दिवस 2026
| तारीख | 26 दिसंबर 2026, शनिवार |
| किनकी याद में | साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह जी व साहिबज़ादा फ़तेह सिंह जी |
| शहादत | 26 दिसंबर 1704, सरहिंद |
वीर बाल दिवस पर छोटा भाषण (कक्षा 1 से 5 के लिए)
आदरणीय प्रधानाचार्य जी, सभी शिक्षकगण और मेरे प्यारे दोस्तों, आप सभी को मेरा नमस्कार।
आज 26 दिसंबर है और हम वीर बाल दिवस मना रहे हैं। आज का दिन गुरु गोबिंद सिंह जी के दो छोटे बेटों — बाबा ज़ोरावर सिंह जी और बाबा फ़तेह सिंह जी — की याद में मनाया जाता है। वे हमारी तरह छोटे बच्चे थे, लेकिन बहुत बहादुर थे। उन्हें अपना धर्म छोड़ने के लिए कहा गया, पर उन्होंने साफ़ मना कर दिया। इसके लिए उन्हें अपनी जान देनी पड़ी।
उनकी कहानी हमें सिखाती है कि हमें हमेशा सच के साथ रहना चाहिए और किसी से डरना नहीं चाहिए। आइए, हम सब साहिबज़ादों को नमन करें। धन्यवाद!
वीर बाल दिवस पर भाषण (कक्षा 6 से 8 के लिए)
आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित शिक्षकगण और मेरे प्रिय साथियों, आप सभी को सादर नमस्कार। आज वीर बाल दिवस के अवसर पर मैं साहिबज़ादों की अमर गाथा के बारे में कुछ शब्द कहना चाहता/चाहती हूँ।
हर वर्ष 26 दिसंबर को हम वीर बाल दिवस मनाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 जनवरी 2022 को इसकी घोषणा की थी। यह दिन सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबज़ादों के बलिदान को समर्पित है।
सन 1704 में आनंदपुर साहिब छोड़ने के बाद छोटे साहिबज़ादे अपनी दादी माता गुजरी जी के साथ बिछड़ गए। उन्हें पकड़कर सरहिंद के सूबेदार वज़ीर ख़ान के सामने लाया गया। उन्हें लालच दिया गया, डराया गया और धर्म बदलने को कहा गया, लेकिन इन नन्हे वीरों ने सिर ऊँचा करके इनकार कर दिया। अंत में उन्हें जीवित ही दीवार में चुनवा दिया गया।
साथियों, सोचिए — जिस उम्र में हम खेलते-कूदते हैं, उस उम्र में उन्होंने इतना बड़ा साहस दिखाया। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि सही बात के लिए डटे रहना ही सबसे बड़ी बहादुरी है। आइए, आज हम संकल्प लें कि हम सच्चाई, साहस और ईमानदारी के रास्ते पर चलेंगे। धन्यवाद! जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल!
वीर बाल दिवस पर लंबा भाषण (कक्षा 9 से 12 के लिए)
माननीय प्रधानाचार्य जी, आदरणीय शिक्षकगण, विशिष्ट अतिथिगण और मेरे प्रिय मित्रों, आप सभी को सादर नमस्कार। आज हम उस दिन को याद करने के लिए एकत्र हुए हैं, जब दो नन्हे बालकों ने अपने साहस से इतिहास की दिशा को अमर कर दिया।
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष में अपना पूरा परिवार न्योछावर कर दिया। उनके चार पुत्र थे — अजीत सिंह, जुझार सिंह, ज़ोरावर सिंह और फ़तेह सिंह। बड़े साहिबज़ादे अजीत सिंह और जुझार सिंह चमकौर के युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए, और छोटे साहिबज़ादे ज़ोरावर सिंह और फ़तेह सिंह ने सरहिंद में धर्म के लिए शहादत दी।
सरकारी विवरण के अनुसार छोटे साहिबज़ादों की आयु मात्र लगभग 7 और 9 वर्ष थी। सरहिंद के ठंडे बुर्ज में दिसंबर की कड़ाके की ठंड में उन्हें उनकी दादी माता गुजरी जी के साथ कैद रखा गया। दरबार में उन्हें बार-बार धर्म छोड़ने के लिए कहा गया — कभी धन-दौलत और सम्मान का लालच दिया गया, तो कभी मृत्यु का भय दिखाया गया। पर दोनों बालक अडिग रहे। 26 दिसंबर 1704 को उन्हें जीवित दीवार में चुनवा दिया गया। आज उसी स्थान पर गुरुद्वारा श्री फ़तेहगढ़ साहिब उनकी वीरता की गवाही देता है।
मित्रों, 9 जनवरी 2022 को प्रधानमंत्री ने 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस घोषित करके इस गाथा को राष्ट्रीय स्मृति का हिस्सा बना दिया। यह दिन केवल एक समुदाय का नहीं, बल्कि पूरे भारत का है, क्योंकि साहिबज़ादों ने जिस सिद्धांत के लिए बलिदान दिया — आस्था की स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और अन्याय के आगे न झुकना — वही हमारे संविधान और हमारी सभ्यता की आत्मा है।
आज के युवाओं के सामने चुनौतियाँ अलग हैं — गलत संगत, नशा, झूठी लोकप्रियता का आकर्षण और आसान रास्तों का लालच। साहिबज़ादों की कहानी हमें बताती है कि असली वीरता सही को सही और गलत को गलत कहने के साहस में है, चाहे उसके लिए कितनी भी कीमत चुकानी पड़े।
आइए, इस वीर बाल दिवस पर हम संकल्प लें कि हम अपने सिद्धांतों पर अडिग रहेंगे, कमज़ोरों के साथ खड़े होंगे और देश की एकता व अखंडता के लिए सदैव तत्पर रहेंगे। यही साहिबज़ादों को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता/करती हूँ। धन्यवाद!
वीर बाल दिवस पर कविता
1. नन्हे वीर (छोटे बच्चों के लिए)
छोटे-छोटे थे वो बालक,
पर हिम्मत थी भारी,
सच की राह न छोड़ी उनने,
दुनिया उन पर वारी।
ज़ोरावर और फ़तेह सिंह जी,
गुरु गोबिंद के प्यारे,
वीर बाल दिवस पर उनको,
नमन करें हम सारे।
2. सरहिंद की दीवार
ठंडी रातें, ठंडा बुर्ज, साथ में दादी माँ,
नन्हे दिल में फिर भी जलती, आस्था की शमा।
लालच आया, डर भी आया, आया हर इक वार,
पर झुकने से बेहतर समझा, चुनना वो दीवार।
ईंट-ईंट जब ऊँची होती, गूँजा जयकारा,
सिर ऊँचा रख मुस्काए वो, गुरु के दो तारे।
सदियाँ बीतीं, फिर भी गाथा, गाता हिंदुस्तान,
वीर बाल दिवस पर करते, हम उनका सम्मान।
3. साहस की सीख
उम्र नहीं, इरादे देखो, यही सिखाते साहिबज़ादे,
सच की ख़ातिर डटे रहे वो, टूटे नहीं उनके वादे।
आओ हम भी प्रण यह लें, अन्याय से न डरेंगे,
देश, धर्म और मानवता का, सदा मान हम करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
वीर बाल दिवस 2026 कब है?
वीर बाल दिवस 26 दिसंबर 2026, शनिवार को है।
वीर बाल दिवस पर भाषण में क्या-क्या बताना चाहिए?
वीर बाल दिवस कब और क्यों मनाया जाता है, साहिबज़ादों का परिचय, सरहिंद की घटना, 2022 में इसकी घोषणा और आज के बच्चों के लिए इसका संदेश।