अटल बिहारी वाजपेयी पर निबंध — 10 लाइन, 300, 500 और 1000 शब्दों में (भाषण व कविता सहित)
अपडेटेड: 14 October 2026
अटल बिहारी वाजपेयी पर निबंध: भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी देश के पूर्व प्रधानमंत्री, प्रखर वक्ता, संवेदनशील कवि और लोकप्रिय जननेता थे। उनका जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था और उनकी जयंती हर वर्ष सुशासन दिवस के रूप में मनाई जाती है। वर्ष 2026 में 25 दिसंबर (शुक्रवार) को अटल जी की 102वीं जयंती है। स्कूलों में अक्सर अटल जी पर निबंध और भाषण लिखने को कहा जाता है, इसलिए यहाँ अटल बिहारी वाजपेयी पर 10 लाइन, 300, 500 और 1000 शब्दों में निबंध, एक छोटा भाषण और उन पर एक कविता सरल हिंदी में दी गई है।
अटल बिहारी वाजपेयी — एक नज़र में
| जन्म | 25 दिसंबर 1924, ग्वालियर (मध्य प्रदेश) |
| माता-पिता | श्रीमती कृष्णा देवी और पं. कृष्ण बिहारी वाजपेयी |
| शिक्षा | विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मीबाई कॉलेज), ग्वालियर; डीएवी कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में एम.ए. |
| प्रधानमंत्री कार्यकाल | 1996 (13 दिन), 1998–1999 और 1999–2004 |
| सम्मान | पद्म विभूषण (1992), सर्वश्रेष्ठ सांसद (1994), भारत रत्न (2015) |
| निधन | 16 अगस्त 2018, नई दिल्ली |
| जयंती | 25 दिसंबर — सुशासन दिवस |
अटल बिहारी वाजपेयी पर 10 लाइन
- अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था।
- उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी एक शिक्षक और कवि थे।
- अटल जी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने।
- वे पाँच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे।
- 1977 में विदेश मंत्री के रूप में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण दिया था।
- उनके कार्यकाल में 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण हुए।
- स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क परियोजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना उन्हीं की देन हैं।
- अटल जी एक प्रसिद्ध कवि और श्रेष्ठ वक्ता थे।
- 2015 में उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
- उनकी जयंती 25 दिसंबर को हर वर्ष सुशासन दिवस के रूप में मनाई जाती है।
अटल बिहारी वाजपेयी पर निबंध 300 शब्दों में
प्रस्तावना: अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के ऐसे नेता थे, जिनका सम्मान हर दल और हर वर्ग के लोग करते थे। वे एक कुशल प्रशासक, ओजस्वी वक्ता और संवेदनशील कवि थे।
प्रारंभिक जीवन: अटल जी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता पं. कृष्ण बिहारी वाजपेयी शिक्षक और कवि थे, जिनसे अटल जी को कविता का संस्कार मिला। उन्होंने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज से स्नातक और कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति विज्ञान में एम.ए. किया। युवावस्था में उन्होंने पत्रकारिता की और राष्ट्रधर्म, पांचजन्य जैसी पत्रिकाओं का संपादन किया।
राजनीतिक जीवन: 1957 में वे पहली बार लोकसभा पहुँचे। 1977 में विदेश मंत्री बने और संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देकर देश का मान बढ़ाया। 1980 में वे भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य और पहले अध्यक्ष बने। वे 1996, 1998 और 1999 में प्रधानमंत्री बने और 1999 से 2004 तक पूरा कार्यकाल पूरा किया।
उपलब्धियाँ: उनके कार्यकाल में पोखरण परमाणु परीक्षण, कारगिल युद्ध में विजय, स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क परियोजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और सर्व शिक्षा अभियान जैसे बड़े काम हुए।
उपसंहार: 16 अगस्त 2018 को अटल जी का निधन हो गया, लेकिन उनके विचार आज भी हमें प्रेरणा देते हैं। उनकी जयंती सुशासन दिवस के रूप में मनाई जाती है, जो उनके ईमानदार और जनहितकारी शासन की याद दिलाती है।
अटल बिहारी वाजपेयी पर निबंध 500 शब्दों में
प्रस्तावना: भारतीय राजनीति के इतिहास में अटल बिहारी वाजपेयी का नाम एक ऐसे नेता के रूप में दर्ज है, जिन्होंने अपनी सादगी, वाणी और दूरदर्शिता से करोड़ों लोगों का दिल जीता। वे जितने कुशल राजनेता थे, उतने ही संवेदनशील कवि भी थे।
जन्म और शिक्षा: अटल जी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ। उनकी माता का नाम कृष्णा देवी और पिता का नाम पं. कृष्ण बिहारी वाजपेयी था। पिता शिक्षक होने के साथ-साथ कवि भी थे। अटल जी ने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मीबाई कॉलेज) से स्नातक और कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही वे राष्ट्रवादी विचारों से जुड़ गए और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कुछ समय के लिए जेल भी गए।
पत्रकार और कवि: राजनीति में आने से पहले अटल जी ने पत्रकार के रूप में राष्ट्रधर्म, पांचजन्य, स्वदेश और वीर अर्जुन जैसे पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया। उनकी कविताएँ देशप्रेम, जीवन-संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं से भरी हैं। “मेरी इक्यावन कविताएँ” उनका प्रसिद्ध काव्य संग्रह है।
राजनीतिक यात्रा: 1957 में वे बलरामपुर से पहली बार सांसद चुने गए। उनके भाषणों से प्रभावित होकर पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी उनकी प्रतिभा की सराहना की थी। वे 10 बार लोकसभा और 2 बार राज्यसभा के सदस्य रहे। 1977 में मोरारजी देसाई सरकार में विदेश मंत्री बने और संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण देने वाले पहले भारतीय नेताओं में शामिल हुए। 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई और अटल जी इसके पहले अध्यक्ष बने।
प्रधानमंत्री के रूप में: अटल जी पहली बार 1996 में केवल 13 दिनों के लिए प्रधानमंत्री बने। 1998 में वे दोबारा प्रधानमंत्री बने और 1999 से 2004 तक उन्होंने पूरा कार्यकाल पूरा किया। उनके नेतृत्व में मई 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण हुए, फरवरी 1999 में लाहौर बस यात्रा से पाकिस्तान के साथ शांति का प्रयास किया गया और 1999 के कारगिल युद्ध में भारत विजयी हुआ। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, सर्व शिक्षा अभियान और नई दूरसंचार नीति जैसे कदमों ने देश के विकास को नई गति दी।
सम्मान: उन्हें 1992 में पद्म विभूषण, 1994 में सर्वश्रेष्ठ सांसद पुरस्कार और 2015 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
उपसंहार: 16 अगस्त 2018 को अटल जी इस दुनिया से विदा हो गए। दिल्ली में उनका समाधि स्थल “सदैव अटल” कहलाता है। उनकी जयंती 25 दिसंबर को सुशासन दिवस के रूप में मनाई जाती है। अटल जी का जीवन हमें सिखाता है कि राजनीति में भी शालीनता, संवाद और राष्ट्रहित सर्वोपरि होने चाहिए।
अटल बिहारी वाजपेयी पर निबंध 1000 शब्दों में
प्रस्तावना: कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो अपने पद से नहीं, अपने आचरण से बड़े होते हैं। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ऐसे ही व्यक्तित्व थे। वे एक साथ कवि, पत्रकार, प्रखर वक्ता, कुशल सांसद और दूरदर्शी प्रधानमंत्री थे। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद हर दल के नेता उनका सम्मान करते थे, इसलिए उन्हें “अजातशत्रु” भी कहा जाता था।
बचपन और परिवार: अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था, जो उस समय एक रियासत थी। उनके पिता पं. कृष्ण बिहारी वाजपेयी विद्यालय में शिक्षक थे और ब्रजभाषा व खड़ी बोली के अच्छे कवि थे। माता कृष्णा देवी धार्मिक और स्नेहशील गृहिणी थीं। घर के साहित्यिक वातावरण ने अटल जी के मन में बचपन से ही कविता और भाषा के प्रति प्रेम जगाया।
शिक्षा: अटल जी ने ग्वालियर के गोरखी विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद विक्टोरिया कॉलेज (अब महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज) से स्नातक किया और कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति विज्ञान में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की। एक रोचक तथ्य यह है कि कानपुर में उन्होंने और उनके पिता ने कानून की पढ़ाई एक साथ, एक ही कक्षा में शुरू की थी।
स्वतंत्रता आंदोलन और पत्रकारिता: छात्र जीवन में ही अटल जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें कुछ समय के लिए गिरफ़्तार भी किया गया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता को चुना और राष्ट्रधर्म (मासिक), पांचजन्य (साप्ताहिक), तथा स्वदेश और वीर अर्जुन (दैनिक) जैसे पत्रों का संपादन किया। पत्रकारिता ने उनकी लेखनी को धार दी और जनता की नब्ज़ समझने की क्षमता दी।
राजनीति में प्रवेश: अटल जी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ भारतीय जनसंघ से जुड़े और जल्द ही इसके प्रमुख नेताओं में गिने जाने लगे। 1957 में वे उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से पहली बार लोकसभा पहुँचे। संसद में उनके भाषण इतने प्रभावशाली होते थे कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने भी उनकी प्रतिभा की प्रशंसा की थी। अपने लंबे संसदीय जीवन में वे 10 बार लोकसभा और 2 बार राज्यसभा के सदस्य रहे।
विदेश मंत्री के रूप में: आपातकाल के बाद 1977 में बनी मोरारजी देसाई सरकार में अटल जी विदेश मंत्री बने। इसी दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा को हिंदी में संबोधित किया। यह भारत और हिंदी भाषा दोनों के लिए गौरव का क्षण था। विदेश मंत्री के रूप में उन्होंने पड़ोसी देशों के साथ संबंध सुधारने पर विशेष ध्यान दिया।
भारतीय जनता पार्टी की स्थापना: 1980 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की स्थापना हुई और अटल बिहारी वाजपेयी इसके पहले अध्यक्ष बने। उनके नेतृत्व और लोकप्रियता ने पार्टी को देश भर में पहचान दिलाई।
प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल: 1996 में अटल जी पहली बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन बहुमत न होने के कारण उनकी सरकार केवल 13 दिन चली। 1998 में वे फिर प्रधानमंत्री बने, पर 1999 में एक वोट से सरकार गिर गई। 1999 के चुनाव के बाद वे तीसरी बार प्रधानमंत्री बने और 2004 तक पूरे पाँच साल सरकार चलाई। वे पूरा कार्यकाल पूरा करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे।
प्रमुख उपलब्धियाँ:
- पोखरण परमाणु परीक्षण (1998): मई 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण कर भारत ने अपनी सामरिक शक्ति का परिचय दिया।
- लाहौर बस यात्रा (1999): फरवरी 1999 में अटल जी बस से लाहौर गए और पाकिस्तान के साथ शांति का प्रयास किया।
- कारगिल विजय (1999): उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने “ऑपरेशन विजय” के ज़रिए कारगिल में घुसपैठियों को खदेड़ा।
- स्वर्णिम चतुर्भुज: दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को जोड़ने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना।
- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (2000): गाँवों को पक्की सड़कों से जोड़ने की योजना।
- सर्व शिक्षा अभियान (2001): 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का राष्ट्रव्यापी अभियान।
- दूरसंचार क्रांति: नई दूरसंचार नीति (1999) से मोबाइल फ़ोन आम लोगों की पहुँच में आए।
कवि अटल: राजनीति की व्यस्तता के बीच भी अटल जी का कवि हृदय सदा जीवित रहा। उनकी कविताओं में देशप्रेम, संघर्ष में भी हार न मानने का भाव और जीवन के प्रति गहरी संवेदना दिखाई देती है। “मेरी इक्यावन कविताएँ” उनका प्रसिद्ध काव्य संग्रह है। संसद हो या जनसभा, उनकी वाणी में कविता जैसी मिठास और तर्क की धार दोनों होती थीं।
सम्मान और पुरस्कार: 1992 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। 1994 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार मिला। 2015 में भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से अलंकृत किया।
निधन और विरासत: लंबी बीमारी के बाद 16 अगस्त 2018 को नई दिल्ली में अटल जी का निधन हो गया। उनकी समाधि “सदैव अटल” राजघाट के पास स्थित है। हिमाचल प्रदेश में 10,000 फ़ीट से अधिक ऊँचाई पर बनी विश्व की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग “अटल टनल” उनके नाम पर है। 2014 से उनकी जयंती 25 दिसंबर को “सुशासन दिवस” के रूप में मनाई जाती है।
उपसंहार: अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि राजनीति में रहते हुए भी शालीनता, संवाद, सहिष्णुता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा जा सकता है। उन्होंने भारत को आर्थिक, सामरिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मज़बूत बनाया। हम विद्यार्थियों को उनके जीवन से परिश्रम, देशप्रेम और कभी हार न मानने की सीख लेनी चाहिए। यही उस महान नेता को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
अटल बिहारी वाजपेयी पर छोटा भाषण
आदरणीय प्रधानाचार्य जी, शिक्षकगण और मेरे प्रिय साथियों, आप सभी को नमस्कार। आज 25 दिसंबर को हम भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती और सुशासन दिवस मना रहे हैं।
अटल जी का जन्म 1924 में ग्वालियर में हुआ था। वे तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने और 1999 से 2004 तक पूरा कार्यकाल पूरा किया। उन्होंने पोखरण परमाणु परीक्षण, स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और सर्व शिक्षा अभियान जैसे बड़े काम किए। वे एक महान कवि और वक्ता भी थे, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देकर देश का मान बढ़ाया।
अटल जी हमें सिखाते हैं कि मतभेद होने पर भी सबका सम्मान करो और कभी हार मत मानो। आइए, हम उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लें। धन्यवाद!
अटल जी पर कविता
(aglasem हिंदी द्वारा विद्यार्थियों के लिए रचित)
ग्वालियर की धरती से निकला, एक अटल विश्वास,
शब्दों में थी कविता जिसके, कर्मों में इतिहास।
संसद में जब बोले अटल, थम जाती थी साँस,
विरोधी भी करते थे जिनकी, वाणी पर विश्वास।
पोखरण में शक्ति दिखाई, लाहौर तक की शांति की राह,
गाँव-गाँव तक सड़क पहुँचाई, पूरी की जन-जन की चाह।
संकट में भी डिगे नहीं वो, सदा रहे गंभीर,
भारत माँ के सच्चे सपूत, कवि-हृदय, वो वीर।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में।
अटल बिहारी वाजपेयी कितनी बार प्रधानमंत्री बने?
तीन बार — 1996 (13 दिन), 1998–1999 और 1999–2004।
अटल जी को भारत रत्न कब मिला?
वर्ष 2015 में।
अटल जी की जयंती किस दिवस के रूप में मनाई जाती है?
25 दिसंबर को सुशासन दिवस (Good Governance Day) के रूप में।