होम › गोवर्धन पूजा 2026: कब है, शुभ मुहूर्त, कथा, पूजा विधि, अन्नकूट और निबंध

गोवर्धन पूजा 2026: कब है, शुभ मुहूर्त, कथा, पूजा विधि, अन्नकूट और निबंध

अपडेटेड: 7 November 2026

गोवर्धन पूजा 2026 दिल्ली, लखनऊ, पटना और भोपाल जैसे शहरों में 10 नवंबर 2026, मंगलवार को है, जबकि जयपुर, अहमदाबाद और मुंबई के पंचांग में यह 9 नवंबर की शाम को दी गई है। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाने वाला यह पर्व अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण की प्रेरणा से ब्रजवासियों ने पहली बार इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी। इस लेख में जानिए गोवर्धन पूजा की तारीख, शहरवार मुहूर्त, कथा, पूजा विधि, अन्नकूट, 10 लाइन, निबंध और शुभकामनाएं।

गोवर्धन पूजा 2026 — तिथि व मुहूर्त (नई दिल्ली)

गोवर्धन पूजा की तारीख10 नवंबर 2026, मंगलवार
प्रातःकाल पूजा मुहूर्तसुबह 6:40 से 8:50 बजे तक
प्रतिपदा तिथि9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे से 10 नवंबर दोपहर 2:00 बजे तक
अगले वर्ष30 अक्टूबर 2027, शनिवार

मुहूर्त द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली का है; अपने शहर का समय नीचे की तालिका में देखें।

गोवर्धन पूजा 2026 कब है: 9 या 10 नवंबर?

इस बार तारीख को लेकर भ्रम इसलिए है क्योंकि प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर की दोपहर 12:31 बजे शुरू होकर 10 नवंबर की दोपहर 2:00 बजे तक रहती है। द्रिक पंचांग में कुछ शहरों के लिए 10 नवंबर की सुबह का मुहूर्त दिया गया है और कुछ के लिए 9 नवंबर की दोपहर-शाम का। आम तौर पर गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन होती है, पर कभी-कभी बीच में एक दिन का अंतर आ जाता है, जैसा इस बार दिल्ली और उत्तर भारत के कई शहरों में है (दिवाली 8 नवंबर, गोवर्धन पूजा 10 नवंबर)।

शहरतारीखपूजा मुहूर्त
दिल्ली10 नवंबर, मंगलवारसुबह 6:40 – 8:50
लखनऊ10 नवंबर, मंगलवारसुबह 6:22 – 8:33
पटना10 नवंबर, मंगलवारसुबह 6:03 – 8:15
भोपाल10 नवंबर, मंगलवारसुबह 6:31 – 8:44
जयपुर9 नवंबर, सोमवारदोपहर 3:28 – शाम 5:39
अहमदाबाद9 नवंबर, सोमवारदोपहर 3:44 – शाम 5:58
मुंबई9 नवंबर, सोमवारदोपहर 3:46 – शाम 6:02

जो शहर सूची में नहीं है, वहाँ के लिए अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर के अनुसार दिन और समय तय करें।

दीपावली 2026 के पाँच दिन

धनतेरस6 नवंबर 2026, शुक्रवार
नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली7 – 8 नवंबर 2026 (अभ्यंग स्नान 8 नवंबर प्रातः)
दिवाली — लक्ष्मी पूजा8 नवंबर 2026, रविवार
गोवर्धन पूजा10 नवंबर 2026, मंगलवार
भाई दूज11 नवंबर 2026, बुधवार

गोवर्धन पूजा क्यों मनाई जाती है?

गोवर्धन पूजा प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का पर्व है। ब्रज के लोगों का जीवन गोवर्धन पर्वत पर निर्भर था: वहीं से गायों को चारा मिलता था, वहीं के जंगलों और झरनों से जीवन चलता था। भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को समझाया कि जो हमारा पालन करता है, उसी का आदर करना चाहिए। इसलिए इस दिन गोवर्धन पर्वत, गाय और अन्न की पूजा की जाती है। यह पर्व इंद्र के अहंकार के टूटने और श्रीकृष्ण द्वारा ब्रज की रक्षा की याद भी दिलाता है।

गोवर्धन पूजा की कथा

श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार ब्रज के लोग हर वर्ष अच्छी वर्षा के लिए देवराज इंद्र की पूजा की तैयारी करते थे। एक बार बालक कृष्ण ने नंद बाबा से पूछा कि यह तैयारी किसलिए हो रही है। नंद बाबा ने बताया कि इंद्र वर्षा करते हैं, इसलिए उनकी पूजा की जाती है।

कृष्ण ने कहा कि हमारी गायों को चारा गोवर्धन पर्वत से मिलता है और हमारा जीवन इन्हीं वनों पर चलता है, इसलिए हमें गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा करनी चाहिए। ब्रजवासियों ने उनकी बात मान ली और इंद्र की जगह गोवर्धन की पूजा करके उसे तरह-तरह के पकवान अर्पित किए।

यह देखकर इंद्र क्रोधित हो गए और उन्होंने ब्रज पर मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। चारों ओर पानी भर गया और लोग डरकर कृष्ण के पास पहुँचे। तब श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपने हाथ की छोटी उँगली पर उठा लिया। पूरा ब्रज, गायों और बछड़ों के साथ, पर्वत के नीचे सुरक्षित हो गया।

सात दिन तक लगातार वर्षा होती रही, पर कृष्ण पर्वत थामे रहे। अंत में इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ। उन्होंने वर्षा रोकी और श्रीकृष्ण से क्षमा माँगी। तभी से कृष्ण को गिरिधारी और गोविंद भी कहा जाता है, और हर वर्ष कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की परंपरा चली आ रही है।

अन्नकूट क्या होता है?

“अन्नकूट” का अर्थ है अन्न का ढेर या पर्वत। इस दिन मंदिरों और घरों में कई तरह के पकवान बनाकर भगवान को भोग लगाया जाता है और फिर प्रसाद के रूप में सब मिलकर खाते हैं। कई जगह मौसमी सब्ज़ियों को मिलाकर अन्नकूट की सब्ज़ी बनाई जाती है, साथ में कढ़ी, बाजरा, चावल, पूरी और खीर का भोग लगता है।

मंदिरों में इस दिन छप्पन भोग की विशेष परंपरा है। लोक मान्यता है कि श्रीकृष्ण दिन में आठ बार भोजन करते थे और सात दिन पर्वत उठाए रहने के कारण भूखे रहे, इसलिए सात दिनों के आठ-आठ पहर के हिसाब से 56 व्यंजन अर्पित किए जाते हैं।

गोवर्धन पूजा कैसे करें: पूजा विधि

पूजा सामग्री: गाय का गोबर (या मिट्टी), रोली, अक्षत, फूल और माला, दूर्वा, दीपक, धूप, दूध, दही, शहद, गंगाजल, खील-बताशे, मिठाई, मौसमी फल और अन्नकूट का भोग।

  1. सुबह स्नान के बाद घर के आँगन या मुख्य द्वार के पास जगह साफ़ करें।
  2. गोबर या मिट्टी से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएँ। कई घरों में इसे लेटे हुए पुरुष के आकार में बनाया जाता है और साथ में गाय, बछड़े और ग्वालों की छोटी आकृतियाँ बनाई जाती हैं।
  3. आकृति को फूलों और दूर्वा से सजाएँ। बीच में (नाभि के स्थान पर) मिट्टी का दीपक रखकर उसमें दूध, दही, शहद और गंगाजल अर्पित करें।
  4. अपने शहर के शुभ मुहूर्त में रोली, अक्षत, फूल, धूप और दीप से पूजा करें।
  5. अन्नकूट का भोग लगाएँ और गोवर्धन पर्वत की कथा सुनें या पढ़ें।
  6. जल की धारा गिराते हुए या हाथ में अक्षत लेकर गोवर्धन की सात परिक्रमा करें।
  7. गाय और बछड़ों को स्नान कराकर तिलक लगाएँ और उन्हें गुड़ व चारा खिलाएँ।
  8. आरती के बाद परिवार और पड़ोसियों के साथ प्रसाद बाँटें।

क्षेत्र और परिवार के अनुसार विधि में थोड़ा अंतर होता है, इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करें।

गोवर्धन परिक्रमा

उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले में स्थित गोवर्धन पर्वत को गिरिराज जी भी कहा जाता है। यहाँ की परिक्रमा लगभग 21 किलोमीटर (सात कोस) की होती है, जिसे श्रद्धालु नंगे पैर पूरा करते हैं। परिक्रमा मार्ग में मानसी गंगा, दानघाटी और कुसुम सरोवर जैसे प्रमुख स्थान आते हैं। गोवर्धन पूजा के दिन यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं।

गोवर्धन पूजा पर 10 लाइन (विद्यार्थियों के लिए)

  1. गोवर्धन पूजा दीपावली के पाँच दिन के पर्व का एक प्रमुख दिन है।
  2. यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाई जाती है।
  3. इसे अन्नकूट पूजा के नाम से भी जाना जाता है।
  4. वर्ष 2026 में दिल्ली में गोवर्धन पूजा 10 नवंबर, मंगलवार को है।
  5. यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की कथा से जुड़ा है।
  6. श्रीकृष्ण ने ब्रज को इंद्र की वर्षा से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था।
  7. इस दिन लोग गोबर या मिट्टी से गोवर्धन की आकृति बनाकर उसकी पूजा करते हैं।
  8. गायों की पूजा की जाती है और उन्हें गुड़ व चारा खिलाया जाता है।
  9. मंदिरों में अन्नकूट और छप्पन भोग का आयोजन होता है।
  10. यह पर्व हमें प्रकृति और पशुओं का आदर करने की सीख देता है।

गोवर्धन पूजा पर निबंध

गोवर्धन पूजा पर निबंध (100 शब्द)

गोवर्धन पूजा हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है, जो दिवाली के आसपास कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। इसे अन्नकूट भी कहते हैं। मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने इंद्र के क्रोध से ब्रजवासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उँगली पर उठा लिया था। इस दिन लोग गोबर या मिट्टी से गोवर्धन की आकृति बनाकर पूजा करते हैं, गायों का आदर करते हैं और तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाते हैं। बच्चे भी इसमें बड़े उत्साह से भाग लेते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि प्रकृति ही हमारा पालन करती है और अहंकार का अंत निश्चित है।

गोवर्धन पूजा पर निबंध (300 शब्द)

प्रस्तावना: भारत त्योहारों का देश है और दीपावली के पाँच दिन के पर्व में गोवर्धन पूजा का विशेष स्थान है। यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाई जाती है। इसे अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है। उत्तर भारत, विशेष रूप से मथुरा, वृंदावन और ब्रज क्षेत्र में यह बड़ी श्रद्धा से मनाई जाती है।

पौराणिक कथा: ब्रज के लोग वर्षा के लिए इंद्र की पूजा करते थे। बालक कृष्ण ने उन्हें समझाया कि हमारी गायों और हमारे जीवन का आधार गोवर्धन पर्वत है, इसलिए उसी की पूजा करनी चाहिए। इससे क्रोधित होकर इंद्र ने मूसलाधार वर्षा की। तब कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर उठाकर पूरे ब्रज की रक्षा की। सात दिन बाद इंद्र ने हार मानकर क्षमा माँगी।

मनाने का तरीका: इस दिन लोग घर के आँगन में गोबर या मिट्टी से गोवर्धन की आकृति बनाते हैं और उसे फूलों से सजाकर पूजा करते हैं। गायों को नहलाकर उनकी पूजा की जाती है। मंदिरों और घरों में अन्नकूट बनता है, जिसमें कई तरह के व्यंजन होते हैं। मथुरा में श्रद्धालु गोवर्धन पर्वत की लगभग 21 किलोमीटर की परिक्रमा करते हैं।

महत्व: गोवर्धन पूजा हमें प्रकृति, पशुओं और अन्न का आदर करना सिखाती है। यह बताती है कि पर्वत, वन और जल हमारे जीवन का आधार हैं और इनकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। इंद्र की कथा हमें अहंकार से दूर रहने की सीख देती है। किसानों और पशुपालकों के लिए यह पर्व विशेष है, क्योंकि उनकी आजीविका सीधे खेती और गायों से जुड़ी है। अन्नकूट में सब लोग एक साथ भोजन करते हैं, जिससे समाज में मेल-जोल और भाईचारा बढ़ता है।

उपसंहार: आज जब पर्यावरण की रक्षा सबसे बड़ी ज़रूरत बन गई है, गोवर्धन पूजा का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो गया है। हमें इस पर्व से प्रेरणा लेकर प्रकृति का सम्मान करना चाहिए।

गोवर्धन पूजा पर कविता

ब्रज में छाई घोर घटा, बरसा जल दिन-रात,
डरे हुए सब ग्वाल-बाल, कौन सँभाले बात।
कान्हा ने मुसकाकर तब, गिरि को लिया उठाय,
गोवर्धन की छाँव तले, ब्रज को लिया बचाय।

गाय, बछड़े, ग्वाल सभी, निर्भय होकर आए,
सात दिवस के बाद वहाँ, इंद्र भी शीश झुकाए।
अन्नकूट का भोग लगे, घर-घर दीप जलाएँ,
धरती, पर्वत, गौ माता का, हम सब मान बढ़ाएँ।

गोवर्धन पूजा की शुभकामनाएं

  • गिरिधारी की कृपा से आपका घर अन्न, धन और खुशियों से भरा रहे। गोवर्धन पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं!
  • जैसे श्रीकृष्ण ने ब्रज की रक्षा की, वैसे ही वे हर मुश्किल में आपका साथ दें। शुभ गोवर्धन पूजा!
  • अन्नकूट का भोग, गौ माता का आशीर्वाद और अपनों का साथ — आपको गोवर्धन पूजा की ढेरों बधाई।
  • प्रकृति का आदर करें, अन्न का सम्मान करें। आपको और आपके परिवार को अन्नकूट की शुभकामनाएं।
  • गोवर्धन महाराज आपके जीवन से हर संकट दूर करें। गोवर्धन पूजा की बधाई!
  • आपके घर में सदा भरे रहें अन्न के भंडार। हैप्पी गोवर्धन पूजा!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गोवर्धन पूजा 2026 कब है? — दिल्ली, लखनऊ, पटना और भोपाल में गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026, मंगलवार को है। जयपुर, अहमदाबाद और मुंबई के लिए द्रिक पंचांग में 9 नवंबर, सोमवार की दोपहर-शाम का मुहूर्त दिया गया है।

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? — नई दिल्ली में प्रातःकाल मुहूर्त 10 नवंबर को सुबह 6:40 से 8:50 बजे तक है। अन्य शहरों का समय ऊपर की तालिका में देखें।

गोवर्धन पूजा क्यों मनाई जाती है? — मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने इंद्र की मूसलाधार वर्षा से ब्रजवासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था। उसी की याद में और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए यह पर्व मनाया जाता है।

गोवर्धन पूजा और अन्नकूट में क्या अंतर है? — दोनों एक ही दिन मनाए जाते हैं। गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा गोवर्धन पूजा कहलाती है, जबकि भगवान को अनेक व्यंजनों का भोग लगाने की परंपरा को अन्नकूट कहते हैं।

गोवर्धन पूजा में क्या बनाया जाता है? — अन्नकूट की मिली-जुली सब्ज़ी, कढ़ी, बाजरा, चावल, पूरी, खीर और मिठाइयाँ बनाई जाती हैं। मंदिरों में छप्पन भोग भी लगता है।

गोवर्धन पर्वत कहाँ है? — गोवर्धन पर्वत उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले में है। इसे गिरिराज जी भी कहते हैं और इसकी परिक्रमा लगभग 21 किलोमीटर की होती है।

2027 में गोवर्धन पूजा कब है? — वर्ष 2027 में गोवर्धन पूजा 30 अक्टूबर, शनिवार को है (नई दिल्ली)।