धनतेरस 2026: तारीख, पूजा मुहूर्त, क्या खरीदें, धनतेरस की कथा और शुभकामनाएं
अपडेटेड: 14 October 2026
धनतेरस 2026 इस वर्ष 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाने वाला धनतेरस पाँच दिन के दीपावली पर्व का पहला दिन है। इस दिन आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि, धन के देवता कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धनतेरस पर बर्तन, सोना-चांदी और नई चीज़ें खरीदना शुभ माना जाता है। इस लेख में जानिए धनतेरस 2026 की तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, धनतेरस पर क्या खरीदें और क्या नहीं, धनतेरस की कथा, पूजा विधि, यम दीपदान और धनतेरस की शुभकामनाएं।
धनतेरस 2026 — तिथि व पूजा मुहूर्त (नई दिल्ली)
| धनतेरस की तारीख | 6 नवंबर 2026, शुक्रवार |
| धनतेरस पूजा मुहूर्त | शाम 6:02 से 7:57 बजे तक |
| प्रदोष काल | शाम 5:33 से 8:09 बजे तक |
| वृषभ काल (स्थिर लग्न) | शाम 6:02 से 7:57 बजे तक |
| त्रयोदशी तिथि | 6 नवंबर सुबह 10:30 से 7 नवंबर सुबह 10:47 बजे तक |
| यम दीपदान | 6 नवंबर 2026, प्रदोष काल में |
मुहूर्त नई दिल्ली के अनुसार है; अन्य शहरों में समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।
दीपावली 2026 के पाँच दिन
| धनतेरस | 6 नवंबर 2026, शुक्रवार |
| नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली | 7 – 8 नवंबर 2026 (अभ्यंग स्नान 8 नवंबर प्रातः) |
| दिवाली — लक्ष्मी पूजा | 8 नवंबर 2026, रविवार |
| गोवर्धन पूजा | 10 नवंबर 2026, मंगलवार |
| भाई दूज | 11 नवंबर 2026, बुधवार |
धनतेरस क्यों मनाया जाता है?
पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है, इसलिए इस दिन को धन्वंतरि जयंती भी कहा जाता है। “धनतेरस” शब्द “धन” और “तेरस” (त्रयोदशी) से मिलकर बना है। इस दिन अच्छे स्वास्थ्य के साथ-साथ धन और समृद्धि के लिए कुबेर जी और माता लक्ष्मी की पूजा होती है। मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है।
धनतेरस की कथा (यम दीपदान की कहानी)
प्राचीन समय में हेम नाम के एक राजा थे। उनके घर पुत्र का जन्म हुआ तो ज्योतिषियों ने बताया कि विवाह के चौथे दिन राजकुमार पर अकाल मृत्यु का संकट है। राजा ने चिंतित होकर राजकुमार को ऐसी जगह रखा जहाँ किसी स्त्री की छाया भी न पड़े, लेकिन समय आने पर राजकुमार का विवाह हो गया।
राजकुमार की पत्नी बहुत बुद्धिमान थी। विवाह के चौथे दिन उसने अपने पति को सोने नहीं दिया। उसने कमरे के दरवाज़े पर अपने सारे सोने-चांदी के गहने और सिक्कों का ढेर लगा दिया और चारों ओर बहुत सारे दीपक जला दिए। फिर वह रात भर अपने पति को कहानियाँ और गीत सुनाती रही।
आधी रात को यमराज सर्प का रूप लेकर राजकुमार के प्राण लेने आए। लेकिन दीपकों की तेज़ रोशनी और गहनों की चमक से उनकी आँखें चौंधिया गईं। वे कमरे के अंदर नहीं जा सके और गहनों के ढेर पर बैठकर पूरी रात कहानियाँ और गीत सुनते रहे। सुबह होते ही मृत्यु का समय निकल गया और यमराज चुपचाप लौट गए।
इस तरह पत्नी की समझदारी से राजकुमार के प्राण बच गए। तभी से धनतेरस की रात यमराज के नाम पर घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाने की परंपरा है, जिसे यम दीपदान कहते हैं। मान्यता है कि इससे परिवार अकाल मृत्यु के भय से सुरक्षित रहता है।
धनतेरस पर क्या खरीदना चाहिए?
- पीतल, तांबे या चांदी के बर्तन — धनतेरस पर बर्तन खरीदना सबसे शुभ माना जाता है। घर लाने के बाद बर्तन को खाली न रखें, उसमें अनाज या मिठाई रखें।
- सोना-चांदी — सोने-चांदी के सिक्के, गहने या लक्ष्मी-गणेश अंकित सिक्के।
- झाड़ू — मान्यता है कि नई झाड़ू खरीदने से घर की दरिद्रता दूर होती है।
- धनिया के बीज — साबुत धनिया खरीदकर पूजा में रखा जाता है और बाद में गमले में बोया जाता है।
- गोमती चक्र और कौड़ियाँ — इन्हें लक्ष्मी पूजा में रखकर तिजोरी में रखा जाता है।
- मिट्टी के दीये और लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति — दिवाली पूजा के लिए।
- वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान या संपत्ति — कई लोग धनतेरस को बड़ी खरीदारी के लिए शुभ मानते हैं।
धनतेरस पर क्या नहीं खरीदना चाहिए?
लोक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर लोहे की वस्तुएँ, कांच का सामान, नुकीली चीज़ें (जैसे चाकू-कैंची), काले रंग की वस्तुएँ और खाली बर्तन घर लाना शुभ नहीं माना जाता। साथ ही इस दिन उधार देने या लेने से भी बचने की सलाह दी जाती है। ये पारंपरिक मान्यताएँ हैं — अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार ही खरीदारी करें।
धनतेरस पूजा विधि
- शाम को घर की साफ़-सफ़ाई करें और मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएँ।
- उत्तर दिशा में एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान धन्वंतरि, कुबेर जी, माता लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- शुभ मुहूर्त (दिल्ली में शाम 6:02 से 7:57) में घी का दीपक जलाएँ।
- रोली, अक्षत, फूल, धूप और नैवेद्य (मिठाई) से पूजा करें। नए खरीदे बर्तन या सिक्के भी पूजा में रखें।
- भगवान धन्वंतरि से अच्छे स्वास्थ्य और कुबेर-लक्ष्मी से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें, फिर आरती करें।
- प्रदोष काल में घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर आटे या मिट्टी का चौमुखा दीपक जलाकर यम दीपदान करें।
धनतेरस पर 10 लाइन (विद्यार्थियों के लिए)
- धनतेरस दीपावली के पाँच दिन के पर्व का पहला दिन है।
- यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है।
- वर्ष 2026 में धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को है।
- इस दिन भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था, इसलिए इसे धन्वंतरि जयंती भी कहते हैं।
- भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और स्वास्थ्य का देवता माना जाता है।
- इस दिन माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है।
- धनतेरस पर लोग बर्तन, सोना-चांदी और नई चीज़ें खरीदते हैं।
- बाज़ार रोशनी और भीड़ से जगमगा उठते हैं।
- शाम को यमराज के लिए घर के बाहर दीपक जलाया जाता है, जिसे यम दीपदान कहते हैं।
- धनतेरस हमें अच्छे स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन मानने की सीख देता है।
धनतेरस की शुभकामनाएं 2026
- धन्वंतरि दें अच्छा स्वास्थ्य, कुबेर भरें भंडार, माँ लक्ष्मी की कृपा से खुशियों से भरा रहे आपका परिवार। धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं!
- दीपों की रोशनी, सोने-चांदी की चमक और अपनों का साथ — शुभ धनतेरस 2026!
- इस धनतेरस आपके घर में सुख, समृद्धि और आरोग्य का वास हो। धनतेरस की बधाई!
- सबसे बड़ा धन है अच्छा स्वास्थ्य — भगवान धन्वंतरि आपको सदा निरोगी रखें। हैप्पी धनतेरस!
- माँ लक्ष्मी आपके घर पधारें और कभी वापस न जाएँ। धनतेरस और दीपावली की शुभकामनाएं।
- नए बर्तन, नई उम्मीदें, नई रोशनी — आपको और आपके परिवार को धनतेरस की ढेरों शुभकामनाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
धनतेरस 2026 कब है?
धनतेरस 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को है।
धनतेरस 2026 का पूजा मुहूर्त क्या है?
नई दिल्ली में धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:02 से 7:57 बजे तक है। प्रदोष काल शाम 5:33 से 8:09 बजे तक रहेगा।
धनतेरस पर किस भगवान की पूजा होती है?
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, कुबेर जी, माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा की जाती है। शाम को यमराज के नाम का दीपक भी जलाया जाता है।
धनतेरस के कितने दिन बाद दिवाली है?
2026 में धनतेरस 6 नवंबर को और दिवाली (लक्ष्मी पूजा) 8 नवंबर को है, यानी धनतेरस के दो दिन बाद।
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