होली एक ऐसा त्योहार है जो पूरे भारत देश में मनाया जाता है। होली का इंतजार सभी लोग करते हैं। होली रंगो का त्योहार है। होली पर सब अपने गिले, शिकवे भुला कर एक दूसरे को गले लगाते है। होली का त्योहार 2,3 दिन तक बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है। होली का त्यौहार पुरे भारत देश में बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। होली आने पर सभी के घरों में अलग अलग तरीके की विभिन्न प्रकार की मिठा़ईयां बनती हैं। कुछ लोगों को बस होली के बारे में यही पता होता है कि होली रंगो का त्योहार होता है। लेकिन वो यह नहीं जानते कि होली क्यों मनायी जाती है, होली का इतिहास क्या है, किस कारण पूरे देश में होली मनाई जाती है। होली कैसे मनाते हैहोली का महत्व क्या है, होलिका कौन थी। आज हम आपको अपने पोस्ट के जरिये इन सभी जानकारियों से रूबरू कराएँगे। इसके साथ स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों से होली पर निबंध लिखने के लिए कहा जाता है। हमारे इस पोस्ट से छात्र होली के बारे में अधिक जानकारी हासिल कर सकते हैं जिससे वे स्कूल या कॉलेज में अच्छे से निबंध प्रतियोगिता में भाग ले सकें।

होली पर निबंध

होली हर साल फाल्गुन के महीने में (मार्च) के महीने में विभिन्न प्रकार के रगों के साथ मनाई जाती है। होली हिंदुओं के एक प्रमुख त्योहार प्रमुख त्यौहार के रूम में जाना जाता है। लेकिन होली सिर्फ हिन्दु ही नहीं बल्कि सभी लोग मनाते हैं। क्योंकि होली उत्साह के साथ मनाई जाती है। होली पर लोग आपस में मिलते हैं गले लगते हैं और एक दूसरे को रंग लगाकर होली का त्यौहार मनाते हैं। इस दौरान धार्मिक और फागुन गीत भी गाये जाते हैं। इस दिन पर हम लोग खासतौर से बने गुजिया, पापड़, हलवा, आदि खाते हैं। रंग की होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। 

होली का त्यौहार मनाने के पीछे एक प्राचीन इतिहास है। प्राचीन समय में हिरण्यकश्यप नाम के एक असुर हुआ करता था। उसकी एक दुष्ट बहन थी जिसका नाम होलिका था। हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानता था। हिरण्यकश्यप का एक पुत्र था जिसका नाम प्रह्लाद था जो भगवान विष्णु भक्त था। हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु के विरोधी था। उन्होंने प्रह्लाद को विष्णु की भक्ति करने से जब रोका और जब प्रह्लाद ने उसकी बातों को मैंने से इंकार कर दिया तो हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को जान से मारने का प्रयास किया। इसमें हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से मदद मांगी। क्योंकि होलिका को आग में न जलने का वरदान मिला हुआ था इसलिए होलिका ने अपने भाई की सहायता करने के लिए हां कर दिया। उसके बाद होलिका प्रह्लाद को लेकर चिता में बैठ गई परन्तु जिस पर विष्णु की कृपा हो उसे क्या हो सकता है और प्रह्लाद आग में सुरक्षित बचे रहे जबकि होलिका उस आग में जल कर भस्म हो गई।

यह कहानी ये बताती है कि बुराई पर अच्छाई की जीत अवश्य होती है। आज भी सभी लोग लकड़ी, घास और गोबर के ढ़ेर को रात में जलाकर होलिका दहन करते हैं और उसके अगले दिन सब लोग एक दूसरे को गुलाल, अबीर और तरह-तरह के रंग डालकर होली खेलते हैं।

भारत में होली का उत्सव अलग-अलग प्रदेशों में अलग अलग तरीके से मनाया जाता है। आज भी ब्रज की होली सारे देश के आकर्षण का बिंदु होती है। लठमार होली जो कि  बरसाने की है वो भी काफ़ी प्रसिद्ध है। इसमें पुरुष महिलाओं पर रंग डालते हैं और महिलाएँ पुरुषों को लाठियों तथा कपड़े के बनाए गए कोड़ों से मारती हैं। इसी तरह मथुरा और वृंदावन में भी १५ दिनों तक होली का पर्व मनाते हैं। कुमाऊँ की गीत बैठकी होती है जिसमें शास्त्रीय संगीत की गोष्ठियाँ होती हैं। होली के कई दिनों पहले यह सब शुरू हो जाता है। हरियाणा की धुलंडी में भाभी द्वारा देवर को सताए जाने की प्रथा प्रचलित है। विभिन्न देशों में बसे हुए प्रवासियों तथा धार्मिक संस्थाओं जैसे इस्कॉन या वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में अलग अलग तरीके से होली के शृंगार व उत्सव मनाया जाता है। जिसमें अनेक समानताएँ भी और अनेक भिन्नताएँ हैं।

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