करवा चौथ व्रत कथा 2026: करवा चौथ की कहानी, पूजा विधि, मुहूर्त और चाँद निकलने का समय
अपडेटेड: 14 October 2026
करवा चौथ 2026 इस वर्ष 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को सुहागिन महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को करवा माता, भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय जी की पूजा की जाती है, करवा चौथ व्रत कथा सुनी जाती है और रात में चाँद को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। इस लेख में आप करवा चौथ की कहानी, पूजा विधि, पूजा सामग्री, सरगी, शुभ मुहूर्त और आपके शहर में चाँद निकलने का समय एक ही जगह पढ़ सकते हैं।
करवा चौथ 2026 — तिथि, मुहूर्त और चंद्रोदय (नई दिल्ली)
| करवा चौथ की तारीख | 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार |
| करवा चौथ पूजा मुहूर्त | शाम 5:38 से 6:56 बजे तक |
| व्रत का समय (उपवास) | सुबह 6:31 से रात 8:17 बजे तक |
| चंद्रोदय (चाँद निकलने का समय) | रात 8:17 बजे |
| चतुर्थी तिथि | 29 अक्टूबर रात 1:06 बजे से 29 अक्टूबर रात 10:09 बजे तक |
स्रोत: पंचांग गणना (नई दिल्ली)। अन्य शहरों का समय नीचे दिया गया है।
करवा चौथ 2026: आपके शहर में चाँद कितने बजे निकलेगा?
करवा चौथ पर सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल है — “आज चाँद कितने बजे निकलेगा?” चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग होता है। प्रमुख शहरों का अनुमानित समय यह है:
| शहर | पूजा मुहूर्त | चंद्रोदय |
| दिल्ली | शाम 5:38 – 6:56 | रात 8:17 |
| लखनऊ | शाम 5:26 – 6:43 | रात 8:06 |
| पटना | शाम 5:10 – 6:27 | शाम 7:52 |
| जयपुर | शाम 5:46 – 7:03 | रात 8:28 |
| भोपाल | शाम 5:44 – 7:00 | रात 8:31 |
| मुंबई | शाम 6:07 – 7:22 | रात 9:00 |
| पुणे | शाम 6:03 – 7:18 | रात 8:58 |
बादल या धुंध होने पर चाँद कुछ देर से दिखाई दे सकता है। अपने शहर का सटीक समय स्थानीय पंचांग से अवश्य देखें।
करवा चौथ व्रत कथा (करवा चौथ की कहानी)
करवा चौथ की पूजा के समय महिलाएँ एक साथ बैठकर व्रत कथा सुनती हैं। सबसे प्रचलित कथा वीरावती नाम की एक राजकुमारी की है। यह कथा सरल भाषा में इस प्रकार है:
वीरावती की कथा
बहुत समय पहले एक नगर में एक साहूकार रहता था। उसके सात बेटे और एक बेटी थी, जिसका नाम वीरावती था। सातों भाई अपनी इकलौती बहन से बहुत प्रेम करते थे। वे हमेशा पहले बहन को खाना खिलाते और उसके बाद ही स्वयं भोजन करते थे।
विवाह के बाद पहली बार करवा चौथ आने पर वीरावती अपने मायके आई हुई थी। उसने अपनी भाभियों के साथ सुबह से निर्जला व्रत रखा। शाम होते-होते भूख और प्यास से वह बहुत व्याकुल हो गई और चाँद निकलने का इंतज़ार करने लगी।
भाइयों से बहन की यह हालत देखी नहीं गई। उन्होंने एक उपाय सोचा। सबसे छोटा भाई दूर एक पेड़ पर चढ़ गया और छलनी के पीछे दीपक जलाकर रख दिया। दूर से देखने पर ऐसा लगा मानो चाँद निकल आया हो। भाइयों ने वीरावती से कहा, “बहन, चाँद निकल आया है, अर्घ्य देकर भोजन कर लो।”
वीरावती ने भाइयों की बात मान ली। उसने दीपक को चाँद समझकर अर्घ्य दिया और भोजन करने बैठ गई। पहला कौर लेते ही उसे छींक आ गई, दूसरे कौर में बाल निकल आया और तीसरा कौर मुँह में डालते ही उसे समाचार मिला कि उसके पति का स्वास्थ्य बहुत बिगड़ गया है।
वीरावती को समझ आ गया कि उसका व्रत अधूरा टूट गया है। वह बहुत दुखी हुई और उसने पूरी श्रद्धा से माता पार्वती से क्षमा माँगी। उसने निश्चय किया कि वह अपने पति की सेवा करेगी और अगले वर्ष पूरे नियम से करवा चौथ का व्रत रखेगी। पूरे साल उसने अपने पति की सेवा की और हर चतुर्थी का व्रत रखा।
अगले वर्ष करवा चौथ पर वीरावती ने पूरी निष्ठा के साथ विधि-विधान से व्रत रखा और चाँद निकलने पर ही अर्घ्य देकर व्रत खोला। उसकी सच्ची श्रद्धा और तपस्या से माता प्रसन्न हुईं और उसके पति पूरी तरह स्वस्थ हो गए। तभी से यह मान्यता है कि करवा चौथ का व्रत पूरे नियम और श्रद्धा से रखने पर पति को लंबी आयु और परिवार को सुख-समृद्धि मिलती है।
करवा माता की कथा
एक दूसरी प्रचलित कथा करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री की है। एक बार उसके पति नदी में स्नान कर रहे थे, तभी एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया। करवा ने अपने सतीत्व के बल से मगरमच्छ को कच्चे धागे से बाँध दिया और यमराज से प्रार्थना की कि उसके पति के प्राणों की रक्षा करें। करवा की निष्ठा देखकर यमराज ने उसके पति को जीवनदान दिया। तभी से इस व्रत को करवा माता के नाम से “करवा चौथ” कहा जाने लगा।
कथा पूरी होने के बाद महिलाएँ करवा माता, गणेश जी और चौथ माता की आरती करती हैं और अपने से बड़ी महिलाओं (जैसे सास) के पैर छूकर आशीर्वाद लेती हैं।
करवा चौथ पूजा विधि (स्टेप बाय स्टेप)
- सरगी: सूर्योदय से पहले सास द्वारा दी गई सरगी खाएँ और पानी पिएँ। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
- निर्जला व्रत: पूरे दिन बिना अन्न और जल के व्रत रखा जाता है। स्वास्थ्य के अनुसार परिवार की परंपरा का पालन करें।
- शृंगार: शाम को स्नान करके नए या लाल रंग के वस्त्र पहनें और सोलह शृंगार करें।
- पूजा की तैयारी: दीवार या कागज़ पर करवा माता का चित्र बनाएँ या लगाएँ। एक चौकी पर गौरी-गणेश, शिव-पार्वती और कार्तिकेय जी को स्थापित करें।
- करवा भरें: मिट्टी या धातु के करवे में जल भरें, उस पर ढक्कन रखकर उसमें चावल या मिठाई रखें।
- पूजा व कथा: शुभ मुहूर्त में रोली, चावल, फूल और मिठाई से पूजा करें, फिर करवा चौथ व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
- करवा बदलना: कथा के बाद महिलाएँ आपस में करवे बदलती हैं और बड़ों का आशीर्वाद लेती हैं।
- चंद्र दर्शन: चाँद निकलने पर छलनी से पहले चाँद और फिर पति का चेहरा देखें। चाँद को जल से अर्घ्य दें।
- व्रत पारण: पति के हाथ से जल पीकर और मिठाई खाकर व्रत खोलें।
करवा चौथ पूजा सामग्री की सूची
- मिट्टी या पीतल का करवा (ढक्कन सहित) और जल
- करवा माता का चित्र या कैलेंडर
- छलनी, दीपक, घी और रुई की बाती
- रोली, कुमकुम, अक्षत (चावल), हल्दी, मेहंदी
- फूल, फूलमाला, धूप-अगरबत्ती, कपूर
- मिठाई, फल, मठरी और पूजा की थाली
- सुहाग का सामान — चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, लाल चुनरी
- गेहूँ या चावल (करवे में रखने के लिए) और दक्षिणा
सरगी क्या है और कब खाई जाती है?
सरगी वह भोजन है जो सास अपनी बहू को करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले देती है। इसमें आमतौर पर फल, सूखे मेवे, मठरी, फेनी या सेवइयाँ, मिठाई और नारियल पानी जैसी चीज़ें होती हैं, जिससे दिन भर व्रत रखने की ताकत मिलती है। सरगी सूर्योदय से पहले, यानी 29 अक्टूबर 2026 को सुबह लगभग 6:30 बजे से पहले खा लेनी चाहिए। जिनकी सास साथ नहीं रहतीं, वे स्वयं भी सरगी तैयार कर सकती हैं।
करवा चौथ व्रत के नियम
- व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है; चाँद को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है।
- पूजा में करवा चौथ की कथा अवश्य सुनी या पढ़ी जाती है।
- मान्यता है कि इस दिन काले या सफ़ेद कपड़े नहीं पहनने चाहिए; लाल, पीला या हरा रंग शुभ माना जाता है।
- गर्भवती महिलाएँ, बीमार या बुज़ुर्ग महिलाएँ डॉक्टर की सलाह पर फलाहार या जल के साथ व्रत रख सकती हैं।
- आजकल कई पति भी अपनी पत्नी के साथ यह व्रत रखते हैं, और कई जगह कुंवारी लड़कियाँ भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से तारों को देखकर व्रत खोलती हैं।
करवा चौथ की शुभकामनाएं 2026
- चाँद की रोशनी, करवे का जल, सिंदूर की लाली और प्यार का पल — आपको करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं!
- आपका सुहाग सदा सलामत रहे, जीवन में हर दिन खुशियों का चाँद निकले। हैप्पी करवा चौथ 2026!
- सात जन्मों का यह बंधन यूँ ही मज़बूत रहे, करवा माता आपकी हर मनोकामना पूरी करें।
- छलनी से देखा चाँद और फिर अपना चाँद — यही है करवा चौथ का सबसे प्यारा पल। शुभ करवा चौथ!
- व्रत आपका, दुआ हमारी — आपकी जोड़ी हमेशा सलामत रहे। करवा चौथ की बधाई!
- आपके प्रेम, विश्वास और समर्पण का यह त्योहार आपके जीवन को सदा रोशन करे। करवा चौथ की ढेरों शुभकामनाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
करवा चौथ 2026 कब है?
करवा चौथ 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को है।
करवा चौथ 2026 पर चाँद कितने बजे निकलेगा?
नई दिल्ली में चंद्रोदय रात लगभग 8:17 बजे होगा। लखनऊ में 8:06, पटना में 7:52, जयपुर में 8:28 और मुंबई में लगभग 9:00 बजे चाँद निकलेगा।
करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
दिल्ली में पूजा का मुहूर्त शाम 5:38 से 6:56 बजे तक है।
करवा चौथ व्रत कथा में किसकी कहानी सुनाई जाती है?
सबसे प्रचलित कथा साहूकार की बेटी वीरावती और उसके सात भाइयों की है। इसके अलावा करवा माता की कथा भी सुनाई जाती है।
करवा चौथ के बाद अगला त्योहार कौन-सा है?
करवा चौथ के बाद अहोई अष्टमी आती है, फिर 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर 2026 को दिवाली मनाई जाएगी।
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