गणेश चतुर्थी पर निबंध हिंदी में | Ganesh Chaturthi Essay In Hindi

भारत एक ऐसा देश है जहाँ के लोगों का त्यौहारों से एक विशेष जुड़ाव है। यहाँ आये दिन हम कोई न कोई त्यौहार मानते हैं इसीलिए हम भारत देश को त्यौहारों का देश भी कहते हैं।विभिन्न संस्कृतियों का एक साथ संगम आपको विश्व के किसी भी देश में देखने को नहीं मिलेगा, ऐसा संगम सिर्फ और सिर्फ हमारे देश में ही मिलेगा जिसके कारण आये दिन यहाँ कोई न कोई त्यौहार होता है। लेकिन इन में से हमारे कुछ त्यौहार जैसे होली, रक्षाबंधन, दिवाली, ईद, क्रिसमस आदि ऐसे हैं जिन्हे हम सब देशवासी एक साथ मिल कर मनाते हैं। ऐसे ही त्यौहारों में से एक है गणेश चतुर्थी का त्यौहार जिसे हम बहुत हर्षोल्लास के साथ बड़ी ही धूम-धाम से मनाते हैं।

भगवान श्री गणेश के जन्मोत्सव को हम लोग प्रतिवर्ष Ganesh Chaturthi के त्यौहार रूप में मानते हैं। यह गणेश चतुर्थी का त्यौहार करीब 11 दिनों तक चलता है। वैसे तो गणेश चतुर्थी पूरे देश में मनायी जाती है लेकिन पश्चिमी भारत उसमे भी खासकर मुंबई में में इसकी रौनक देखने ही वाली होती है। मुंबई में गणेश चतुर्थी का उत्सव देखते ही बनता है जहाँ इस दौरान देश भर के लोगो का ही नहीं अपितु विदेश तक के लोगो का ताता लगा रहता है।

इस साल Ganesh Chaturthi 2022 का आयोजन 31 अगस्त 2022 को किया जा रहा है। लोग गणेश चतुर्थी के समारोह के दौरान भाषण देते हैं और इसके विषय में बताते हैं। इस पेज के माध्यम से आप गणेश चतुर्थी पर निबंध हिंदी में पढ़ सकते हैं। इस निबंध से आप गणेश चतुर्थी कब, कैसे और क्यों मनाई जाती है और गणेश चतुर्थी का महत्व आदि के बारे में जान सकते हैं।

गणेश चतुर्थी पर निबंध हिंदी में | Ganesh Chaturthi Essay In Hindi

गणेश चतुर्थी पर निबंध 400 शब्द में

गणेश चतुर्थी, हिंदू धर्म में मनाया जानें वाला खास त्यौहार है। Ganesh Chaturthi का त्यौहार अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार हर साल अगस्त या सितंबर के महीनें में (हिंदी कैलेंडर के अनुसार भाद्र माह की चतुर्थी) मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी का त्यौहार पूरे 11 दिन का होता है। यह त्यौहार 11 दिनों तक चलने वाला सबसे लंबा त्यौहार है। गणेश चतुर्थी के दिन लोग अपने घरों में गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति लेकर आते हैं और 10 दिन तक उनकी पूजा करने के बाद 11वें दिन धूम-धाम से गणेश विसर्जन कर देते हैं।

गणेश चतुर्थी का त्यौहार देश के विभिन्न राज्यों में मनाया जाता है लेकिन मुख्य रूप से महाराष्ट्र में मनाया जानें वाला सबसे बड़ा त्यौहार है। यह त्यौहार चतुर्थी के दिन घर और मंदिर में गणेश मूर्ति स्थापना से शुरू होता है। लोग अपने घरों में गणेश जी मूर्ति बड़ी धूमधाम से ढोल-नगाड़े बजाकर लेकर आते हैं। गणेश चतुर्थी से कुछ दिनों पहले ही बाजारों में रोनक शुरू हो जाती और मिट्टी से बनीं गणेश जी की अलग अलग तरह की प्रतिमाएँ मिलती है। सभी लोग गणेश चतुर्थी से लेकर अगले 10 दिन तक अपने घरों और मंदिरों में गणेश भगवान की पूजा और अराधना करते हैं, गीत गाते हैं, नाच गाना करते हैं, मंत्रोच्चारण करते हैं, आरती करते और गणेश जी को मोदक का प्रसाद चढ़ाते हैं। इन दिनों में मंदिरों में खूब साज-सजावट की जाती। कोई भी नया काम शुरू करने से पहले गणेश भगवान को सबसे पहले याद किया जाता है। गणेश भगवान सभी बच्चों के सबसे प्रिय भगवान हैं। बच्चे उन्हें प्यार से गणेशा बुलाते हैं।

गणेश भगवान के जन्मदिन के रूप में गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। एक बार भगवान शिव ने गुस्से में अपने पुत्र गणेश का सर काट दिया था। लेकिन फिर एक हाथी के बच्चे का सर उनके धड़ से जोड़ दिया गया था। इस तरह से गणेश भगवान ने अपना जीवन दोबारा पाया। इस दिन को ही गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। अन्नत चतुर्दशी के दिन यानि 11वें दिन गणेश विसर्जन के साथ गणेश भगवान को विदा कर दिया जाता है और अगले बरस जल्दी आने की कामना की जाती है।

ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान गणेश जी अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी पर उतरते हैं और जो कोई भी इस दौरान उनकी पूजा करता है वह जो भी प्रयास करता है उसमें सफलता मिलना निश्चित है। गणेश चतुर्थी को किस तरह से पहली बार मनाया गया था, जिस तरह से यह त्योहार के दौरान चंद्रमा को घूरने के मिथकों से जुड़ा है।

गणेश चतुर्थी पर शार्ट निबंध 200 शब्द में

गणेश चतुर्थी भारत के सभी बड़े त्यौहारों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। गणेश चतुर्थी का त्यौहार मुख्य रूप से हिंदूओं का त्यौहार है लेकिन अब सभी धर्म के लोग इस त्यौहार को बड़ी ही धूमधान से मनाते हैं। गणेश चतुर्थी की तैयारियां कुछ दिन पहले ही शुरू कर दी जाती हैं। गणेश चतुर्थी के दिन लोग गणेश जी मूर्ति को सजाकर व नाचते-गाते हुए अपने घरों और मंदिरों में लेकर आते हैं और स्थापित करते हैं। लोग अपने घरों और मंदिरों की साफ-सफाई करते हैं और सजाते है। गणेश चतुर्थी से लेकर अगले 10 दिनों तक भगवान गणेश की पूजा की जाती, भक्ति गीत गाए जाते हैं, मोदक का प्रसाद चढ़ाया जाता है, अलग अलग तरह के पकवान बनते हैं, मंदिरों में भंडारे का आयोजन भी किया जाता है।

गणेश चतुर्थी के दिन बाजारों में बहुत चहल-पहल रहती है। इस दिन बाजारों में श्री गणेश जी की सुंदर मूर्तियाँ और उनके चित्र बिकते हैं। मिट्टी से बनाई गईं श्री गणेश जी की मूर्तियाँ बहुत ही भव्य लगती हैं। सभी लोग गणेश भगवान जी की मूर्ति को अपने-अपने घरों में उचित स्थान पर स्थापित करते हैं।

गणेश चतुर्थी का त्यौहार अगस्त और सितंबर के महीनें में मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस त्यौहार का आयोजन भाद्र के महीनें में किया जाता है। गणेश उत्सव के 10 दिन पूरे होने के बाद 11वें दिन गणेश विसर्जन की तैयारी भी बड़ी ही धूमधाम से की जाती है। गणेश विर्सजन के लिए एक सुंदर रथ बनाया जाता है और रंग-बिरंगे फूलों से सजाया जाता है। जिसके बाद गणेश भगवान की आरती की जाती है और उनकी मूर्ति को रथ में बिठाया जाता है। फिर पूरे शहर में शोभायात्रा निकाली जाती है। गणेश शोभायात्रा में लोग गुलाल उड़ाते हैं, पटाखे जलाते हैं, गणपत्ति बप्पा मोरिया, मंगल मूर्ति मोरिया के नारे लगाये जाते हैं। आज कल लोग डीजे भी बजाने लगे हैं। अाखिरी में शहर के किसी तालाब, नदी या समुंदर में गणेश भगवान की प्रतिमा को विसर्जित कर दिया जाता है।

गणेश चतुर्थी पर 10 लाइनें

  1. गणेश चतुर्थी मुख्य रूप से हिंदूओं का त्यौहार है।
  2. गणेश उत्सव भाद्र माह (अगस्त और सितंबर) में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है।
  3. यह त्यौहार श्री गणेश जी के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है।
  4. गणेश चतुर्थी 11 दिन का एक विशाल महोत्सव होता है।
  5. गणेश चतुर्थी का उत्सव सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में धूमधाम से मनाया जाता है।
  6. गणेश चतुर्थी के दिन लोग अपने घरों और मंदिरों में गणेश भगवान की प्रतिमा को स्थापित करते हैं।
  7. भगवान गणेश की पूजा में लाल चंदन, कपूर, नारियल, गुड़ और उनका प्रिय मोदक होता है।
  8. लोग रोजाना मंत्रों का उच्चारण करते हैं और गीत और आरती गाकर गणेश जी की पूजा करते हैं।
  9. पूरे 10 दिनों की पूजा के बाद 11वें दिन गणेश महाराज की प्रतिमाम को विसर्जित कर दिया जाता है।
  10. बड़े-बड़े बॉलीवुड स्टार भी गणेश उत्सव में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।

गणेश भगवान के 12 नाम

  1. सुमुख
  2. एकदंत
  3. कपिल
  4. गजकर्ण
  5. लंबोदर
  6. विकट
  7. विघ्नविनाशक
  8. विनायक
  9. धूमकेतू
  10. गणाध्यक्ष
  11. भालचन्द्र
  12. गजानन

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